नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छपरा सीट पर बड़ा सियासी ड्रामा खत्म हो गया है। लंबे इंतजार के बाद RJD ने भोजपुरी सुपरस्टार खेसारीलाल यादव की पत्नी चंदा देवी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अब वह पार्टी की ओर से छपरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। हालांकि आरजेडी की ओर से इसका औपचारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक चंदा देवी जल्द ही नामांकन दाखिल करेंगी।
खेसारीलाल यादव का सपना हुआ पूरा
खेसारीलाल यादव ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि वह चाहते हैं उनकी पत्नी राजनीति में आकर जनता के बीच काम करें। उन्होंने बताया था कि वे चार दिनों से पत्नी को चुनाव लड़ाने के लिए मना रहे हैं, लेकिन वह तैयार नहीं हो रही थीं। खेसारी ने कहा था। मेरी पत्नी पारिवारिक महिला हैं, पूरा ध्यान बच्चों और घर पर देती हैं। लेकिन अब लोग चाहते हैं कि वह राजनीति में आएं, इसलिए मैं उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा हूं। आखिरकार अब चंदा देवी ने हामी भर दी है और आरजेडी ने उन्हें टिकट देकर छपरा की सियासत में बड़ा दांव चला है।
बीजेपी ने काटा सी.एन. गुप्ता का टिकट, मैदान में उतारीं छोटी कुमारी
इस सीट पर बीजेपी ने बड़ा बदलाव करते हुए वर्तमान विधायक सी.एन. गुप्ता का टिकट काट दिया है। उनकी जगह छोटी कुमारी को प्रत्याशी बनाया गया है, जो जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय रही हैं। बीजेपी का यह कदम एंटी-इनकंबेंसी को देखते हुए उठाया गया माना जा रहा है। इस तरह अब छपरा सीट पर मुकाबला चंदा देवी बनाम छोटी कुमारी के बीच दिलचस्प होने वाला है। एक ओर फिल्म इंडस्ट्री की लोकप्रिय चेहरे की पत्नी, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर की महिला कार्यकर्ता। छपरा विधानसभा सीट बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। सी.एन. गुप्ता पिछले दो बार से यहां से विधायक रहे हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने 75,710 वोट पाकर आरजेडी के रणधीर सिंह को हराया था, जिन्हें 68,939 वोट मिले थे। 2015 में भी उन्होंने लगभग 11 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। छपरा सीट पर यादव, राजपूत, ब्राह्मण, बनिया और मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार रणधीर सिंह आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो चुके हैं और मांझी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार छपरा की लड़ाई पूरी तरह से स्टार बनाम ग्राउंड पॉलिटिक्स की है। जहां एक तरफ चंदा देवी को भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रियता और खेसारीलाल यादव के फैन बेस का सहारा मिलेगा, वहीं छोटी कुमारी अपने स्थानीय नेटवर्क और जनसंपर्क के दम पर मैदान में हैं। छपरा की यह जंग तय करेगी कि ग्लैमर का असर राजनीति पर भारी पड़ता है या जमीनी जुड़ाव जीतता है।





