नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। चुनाव 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इसी बीच, अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि पोस्टल बैलेट पेपर क्या होता है और इसका इस्तेमाल कौन करता है। आइए हम आपको यहां इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।
पोस्टल बैलट पेपर क्या है?
हर नागरिक को वोट डालने का अधिकार है, लेकिन कभी-कभी कुछ लोग मतदान केंद्र तक शारीरिक रूप से नहीं पहुंच पाते। इन्हीं लोगों के लिए है पोस्टल बैलट पेपर। यह एक विशेष प्रकार का मतपत्र है, जिसे डाक के जरिए भेजा जाता है और वोटर घर बैठे ही अपना वोट डाल सकता है। प्रक्रिया बहुत सरल है। मतदाता डाक के जरिए अपना पोस्टल बैलट प्राप्त करता है, अपने वोट को भरता है और तय समय सीमा के भीतर चुनाव अधिकारियों को वापस भेज देता है। भारत का चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है, ताकि हर पोस्टल बैलट सही तरीके से प्राप्त और गिना जाए। मतगणना के समय, हर पोस्टल बैलट की सावधानीपूर्वक जांच और सत्यापन किया जाता है, और फिर इसे बाकी मतों के साथ जोड़ा जाता है। इस तरह पोस्टल बैलट वोटिंग सुरक्षित, पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनती है।
पोस्टल बैलट के जरिए कौन मतदान कर सकता है?
हर मतदाता पोस्टल बैलट का इस्तेमाल नहीं कर सकता। चुनाव आयोग ने कुछ विशेष श्रेणियों के मतदाताओं को ही यह सुविधा दी है। जैसे-
सेवा मतदाता: इसमें शामिल हैं सशस्त्र बल, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र से बाहर तैनात राज्य पुलिस सदस्य और विदेश में काम कर रहे सरकारी अधिकारी। उनके जीवनसाथी भी यदि उनके साथ रहते हैं, तो वे भी मतदान के पात्र होते हैं। ये वोटर इलेक्ट्रॉनिक डाक मतपत्र प्रणाली का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी: चुनाव आयोग ने पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों को भी पोस्टल बैलट की सुविधा दी है। मतदान के दिन ये लोग चुनावी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए पोस्टल बैलट सुनिश्चित करता है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन: 80 साल या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक और मतदान केंद्रों तक जाने में कठिनाई महसूस करने वाले दिव्यांगजन भी पोस्टल बैलट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें फॉर्म 12डी भरकर रिटर्निंग ऑफिसर को आवेदन करना होता है। सत्यापन के बाद उन्हें पोस्टल बैलट भेज दिया जाता है, जिससे वे घर बैठे आराम से वोट डाल सकते हैं। इस तरह, पोस्टल बैलट प्रणाली सुनिश्चित करती है कि सेवा, ड्यूटी, उम्र या स्वास्थ्य की बाधाओं के बावजूद सभी योग्य मतदाता अपने मत का प्रयोग कर सकें।
निवारक हिरासत में मतदाता
कुछ विशेष मतदाता भी पोस्टल बैलट का इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, निवारक हिरासत में रखे गए मतदाता अपने वोट का प्रयोग पोस्टल बैलट के जरिए कर सकते हैं। ध्यान रखें कि जेल की सजा काट रहे लोग इसमें शामिल नहीं होते। इसके अलावा, हाल के वर्षों में चुनाव आयोग ने मतदान के दिन चुनाव कवरेज में लगे मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों को भी पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाले सभी पात्र मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग कर सकें।




