नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन, असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने सीवान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विवादित और भड़काऊ बयान दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा ने स्थानीय आरजेडी प्रत्याशी ओसामा शहाब का नाम लिए बिना, उनकी तुलना आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से की और कहा कि देश के सभी ‘ओसामा’ को खत्म करना है।
‘राम-सीता का देश, ओसामा का वर्चस्व नहीं’
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने भाषण में सीधे तौर पर राष्ट्रवादी और धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास किया।सरमा ने कहा, यह देश राम-सीता का देश है और कभी भी ओसामा बिन लादेन जैसा किसी का वर्चस्व नहीं मान्य होगा।” उन्होंने आगे कहा कि “इस देश के जितने भी ओसामा हैं, सबको एक-एक करके खत्म करना है। उन्होंने कहा, मुझे पार्टी ने यहां भेजा, मैंने सोचा राम-सीता मिलेंगे, लेकिन लोगों ने कहा ओसामा भी है। मैंने पूछा, ओसामा बिन लादेन तो गया, अब ये कौन है? लोगों ने कहा, वैसा ही छोटा ओसामा है। इसलिए इस चुनाव में हमें ऐसे ओसामा को खत्म करना होगा।
शहाबुद्दीन और घुसपैठियों पर भी निशाना
आरजेडी प्रत्याशी ओसामा शहाब, दिवंगत बाहुबली नेता शहाबुद्दीन के बेटे हैं। CM सरमा ने शहाबुद्दीन का नाम लेकर भी आरजेडी पर हमला बोला।
असम के मुख्यमंत्री ने कहा, पिता का नाम शहाबुद्दीन था, जिसने मर्डर में गिनीज रिकॉर्ड बनाया। अगर इसे यहीं नहीं रोका गया तो ये पूरे देश में फैल जाएगा। सरमा ने दावा किया कि घुसपैठियों को वोट देने का अधिकार नहीं है और बिहार की वोटर लिस्ट से ऐसे घुसपैठियों को बाहर कर दिया गया है। उन्होंने अंत में कहा कि जब देश में हिन्दू जग जाएगा, तो कोई ओसामा या औरंगजेब सामने नहीं टिक पाएगा।
CM सरमा का यह बयान चुनाव आयोग की नजरों में आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है और इससे सीवान क्षेत्र का चुनावी माहौल और भी ज्यादा संवेदनशील हो सकता है। हिमंत बिस्वा सरमा के इस भड़काऊ बयान पर आरजेडी और महागठबंधन की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। हालाँकि, मौजूदा चुनावी माहौल में नेताओं ने सीधे तौर पर ‘छोटा ओसामा’ वाले बयान का जवाब देने से ज़्यादा, बीजेपी की नकारात्मक राजनीति पर हमला बोला है।
RJD/तेजस्वी यादव का रुख
आरजेडी नेताओं ने हिमंत बिस्वा सरमा के बयान को बीजेपी की चुनावी हताशा बताया है और इसे ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। तेजस्वी यादव और अन्य आरजेडी नेताओं ने अक्सर एनडीए पर नकारात्मक बातें करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बीजेपी के पास बिहार के विकास के लिए कोई विजन या ब्लूप्रिंट नहीं है। इसलिए, वे हर बार चुनाव को हिन्दू-मुस्लिम और ‘ओसामा’ जैसे विभाजनकारी मुद्दों की ओर मोड़ना चाहते हैं।
आरजेडी नेताओं ने CM सरमा के उस बयान पर भी पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने शहाबुद्दीन को मर्डर का रिकॉर्डधारी बताया। आरजेडी का कहना है कि बीजेपी जानबूझकर तेजस्वी यादव को उनके पिता लालू यादव की ‘जंगलराज’ वाली विरासत से जोड़कर हमला कर रही है, जबकि तेजस्वी यादव बेरोजगारी और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
महागठबंधन नेता लगातार कह रहे हैं कि जनता सब देख रही है कि पिछले 20-21 वर्षों में एनडीए ने क्या काम किया है, और वे चुनाव को महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द रखना चाहते हैं, न कि भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे पर।महागठबंधन के अन्य नेताओं ने सरमा के बयानों को अल्पसंख्यकों का अपमान बताया है।
कांग्रेस और वामदल के नेताओं ने हिमंत बिस्वा सरमा पर सांप्रदायिक कार्ड खेलने और घोषणा पत्र जारी न करने के लिए एनडीए की आलोचना से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। ओसामा शहाब के नाम को आतंकवादी से जोड़ने को महागठबंधन ने अल्पसंख्यक समुदाय का अपमान करार दिया है और इसे ‘लोकतांत्रिक मूल्यों’ के खिलाफ बताया है। आरजेडी ने हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर सीधे ‘ओसामा’ शब्द का इस्तेमाल करके पलटवार करने के बजाय, इसे बीजेपी की विजन रहित और नकारात्मक राजनीति के रूप में पेश करने की रणनीति अपनाई है, ताकि चुनाव का फोकस विकास और रोजगार पर बना रहे।




