नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का चुनाव प्रचार मंगलवार शाम 6 बजे थम जाएगा। इसके बाद सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को केवल घर-घर संपर्क और बूथ प्रबंधन की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। पहले चरण में 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा। इस चरण में 3 करोड़ 75 लाख से अधिक मतदाता 1314 उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में बंद करेंगे।
आखिरी दिन का जोरदार प्रचार
प्रचार के अंतिम दिन सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा की ओर से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बड़हिया में हुंकार भरेंगे। वहीं, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा हलसी में संयुक्त सभा करेंगे। योगी का फोकस हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी भावनाओं को छूने पर रहेगा, जबकि चिराग और उपेंद्र अपने-अपने गठबंधनों के लिए जनसमर्थन जुटाने में लगे हैं।
इन सीटों पर है सबसे ज्यादा मुकाबला
दीघा विधानसभा में सबसे ज्यादा 4,57,657 मतदाता हैं। बरबीघा विधानसभा में सबसे कम 2,31,998 मतदाता हैं। कुढ़नी और मुजफ्फरपुर सीटों पर सर्वाधिक 20-20 प्रत्याशी मैदान में हैं। भोरे, अलौली और परबत्ता में सबसे कम 5-5 उम्मीदवार हैं। चुनाव आयोग ने इस चरण में 45,324 मतदान केंद्र बनाए हैं ग्रामीण क्षेत्र: 36,733 शहरी क्षेत्र: 8,608 महिलाओं द्वारा संचालित बूथ: 926 दिव्यांगजनों द्वारा संचालित बूथ: 107 मॉडल बूथ: 320 औसतन प्रति बूथ 827 मतदाता वोट डालेंगे। चुनाव आयोग ने नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया है और सभी मतदान केंद्रों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 1049 चेकपोस्ट पर सघन जांच चल रही है। अब तक 1005 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग और रियल टाइम रिपोर्टिंग होगी। EVM और VVPAT मशीनों का रैंडमाइजेशन पूरा हो चुका है।
सबसे बड़ा और सबसे छोटा विधानसभा क्षेत्र
सबसे बड़ा सूर्यगढ़ा 624.751 वर्ग किमी सबसे छोटा: बांकीपुर 16.239 वर्ग किमी चुनाव आयोग ने मतदान को “लोकतंत्र का उत्सव” बनाने की अपील की है। इसके लिए मोबाइल जमा सुविधा, नई वीआईएस पर्ची, और ECI-Net ऐप को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि अधिकतम लोग वोट डालने आएं। पहले चरण का प्रचार समाप्त होने के साथ ही बिहार की सियासत अब घर-घर संपर्क और मतदान केंद्रों की तैयारी पर केंद्रित हो गई है। 6 नवंबर को होने वाला मतदान तय करेगा कि 18 जिलों की 121 सीटों पर किसके सिर सजेगी जीत का ताज। अगले 24 घंटे हर उम्मीदवार और मतदाता दोनों के लिए बेहद अहम हैं।




