नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। रक्षाबंधन केवल एक पाव नहीं बल्कि भाई बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाई के कलाई पर राखी बांधती हैं। हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि को त्यौहार मनाया जाता है। जो कि बड़े उत्साह के साथ पूरे देश में हर जगह मनाया जाता है। तो वहीं त्यौहार के साथ ही वास्तु शास्त्र में भी इस दिन के लिए कुछ चीज बताई गई है जिन्हें आपको ध्यान में रखते हुए यह त्योहार मनाना चाहिए तो चलिए उनके बारे में आपको बताते हैं।
राखी से जुड़ा यह वास्तु उपाय
वास्तु शास्त्र में बताया गया है की सबसे पहले आपको स्नान दान करके भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। उसके बाद राखी जो आप अपने भाई के लिए लाए हैं उसे भगवान को अर्पित करना चाहिए उसके बाद वही रखी आपको अपने भाई को बांधने चाहिए। इससे राखी के साथ-साथ भगवान का आशीर्वाद भी आपके भाई के ऊपर रहता है जिसके साथ उसके जीवन में चल रही सारी तकलीफें दूर हो जाती है और भगवान उसकी हर संकट से रक्षा भी करते हैं।
राखी बांधते समय आपको भद्राकाल और उसकी दिशा का बिल्कुल भी ध्यान रखना चाहिए। भद्राकाल में कभी भी राखी नहीं बांधा जाता है ऐसा माना जाता है कि भद्राकाल में राखी बांधने से कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है। इसीलिए इस काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। राखी बांधते समय भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। इससे ऊर्जा का प्रवाह सकारात्मक होता है और पूजा का फल पूर्ण मिलता है।
राखी बांधते समय भाई के सिर पर कोई रुमाल या कपड़ा ज़रूर रखें, इसे शुभ माना जाता है। राखी बांधते समय तीन गांठें लगाना शुभ माना जाता है। हर गांठ के साथ बहन भाई के लिए स्वास्थ्य, सुख और लंबी उम्र की प्रार्थना करती है।तीन गांठें लगाने से भाई-बहन का रिश्ता और अधिक मजबूत होता है। इसलिए इस राखी के त्यौहार राखी बांधते समय इन सभी बातों का अगर आप ध्यान रखेंगे तो आपका त्यौहार काफी अच्छा और सफल रूप से मानेगा।
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