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Thursday, March 12, 2026
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महाराष्ट्र चुनाव में औरंगाबाद पूर्व विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण है? जानें क्या है इस सीट का इतिहास

महाराष्ट्र विधानसभा सीटों में से एक औरंगाबाद पूर्व सीट महत्वपूर्ण है। यहां से सत्ताधारी महायुति और महा विकास अघाड़ी (MVA) चुनाव में अपनी-अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को पूरे राज्य की 288 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। चुनाव के परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबला महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच है। महायुति में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं। वहीं, महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं। चुनावी रण में महाराष्ट्र की औरंगाबाद पूर्व सीट चर्चा में बनी हुई है।

औरंगाबाद पूर्व विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण है? 

औरंगाबाद पूर्व विधानसभा सीट महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह एक ऐतिहासिक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। औरंगाबाद मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और राजनीतिक पार्टियों के लिए यहां को वोटर्स को साधना एक बड़ा टास्क है। 2019 में भाजपा के अतुल सावे ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार उनका मुकाबला ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व सांसद सैयद इम्तियाज जलील से है।

औरंगाबाद का इतिहास 

औरंगाबाद पूर्व क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से मराठवाड़ा और हैदराबाद निजामशाही का हिस्सा रहा है जहां हिंदू-मुस्लिम तनाव और मतभेदों की लंबी कहानी है। यहां की राजनीति में भावनात्मक मुद्दे जैसे नाम परिवर्तन और धार्मिक विभाजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाजपा AIMIM और अन्य दलों के बीच यह सीट एक प्रमुख मुकाबला है क्योंकि AIMIM ने इसे अपनी सबसे मजबूत सीटों में से एक माना है।

औरंगाबाद पूर्व विधानसभा क्षेत्र में विकास के मुद्दे  

औरंगाबाद पूर्व विधानसभा क्षेत्र में विकास के मुद्दे जैसे जल आपूर्ति, रोजगार, और उद्योगों का अभाव भी प्रमुख हैं। जिन पर जलील और सावे दोनों ने अपने-अपने तरीके से ध्यान केंद्रित किया है। इस सीट पर राजनीति इसलिए हो रही है क्योंकि यह मुस्लिम और हिंदू वोटों के बीच ध्रुवीकरण और स्थानीय विकास की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का एक बड़ा मंच बन चुकी है।

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