नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के बाद राज्य की राजनीति में बड़े उतार चढ़ाव देखने को मिले। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र में 3 मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल देखने को मिला। दरअसल विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजों के बाद महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना और बीजेपी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया था कि शिवसेना ने NDA से अलग होने का फैसला ले लिया। जिसके बाद राज्य में किसी की भी सरकार न बनते देख महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
23 नवंबर 2019 की सुबह देवेंद्र फडणवीस ने CM की शपथ ली
कुछ दिन बाद अचानक आधी रात को महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया और 23 नवंबर 2019 की सुबह देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की शपथ ली। उनके साथ अजित पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली। हालांकि, बीजेपी बहुमत साबित करने में नाकाम रही। इसके चलते 3 दिन बाद देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को इस्तीफा देना पड़ा। इससे एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया।
महाराष्ट्र में यह राजनीतिक संकट उस समय समाप्त हुआ जब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच एक नया गठबंधन बना, जिसका नाम महाविकास अघाड़ी (MVA) रखा गया। इसके बाद नए सियासी समीकरण से 28 नवंबर 2019 को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ ली।
MVA की सरकार नवंबर 2019 से मई 2022 तक ही चल पाई
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में MVA की सरकार नवंबर 2019 से मई 2022 तक ही चल पाई। वर्ष 2022 में हुए विधान परिषद चुनाव के दौरान कुछ ऐसी स्थिति बनी जिसके कारण महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासी संकट खड़ा हो गया। दरअसल जून 2022 में महाराष्ट्र में विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव कराए गए। जिसके लिए 11 उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े थे। MVA की तरफ से शिवसेना, NCP और कांग्रेस के गठबंधन ने 6 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे।
वहीं बीजेपी ने अपने 5 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे। इसमें विशेष बात यह ये है कि शिवसेना गठबंधन के पास सभी 6 उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल था। लेकिन इसके बावजूद वह 1 सीट पर हार गए। और NCP-शिवसेना के खाते में इन 5 में से कांग्रेस को केवल 1 सीट पर जीत हासिल हुई और NCP-शिवसेना के खाते में 2-2 सीटें ही आ पाई।
एकनाथ शिंदे 30 जून 2022 को महाराष्ट्र के सीएम बन गए
वहीं, बीजेपी के पास सिर्फ 4 सीटें जितने की संख्या बल मौजूद थी, लेकिन बीजेपी पांचवीं सीट भी जितने में कामयाब रही। इसका बड़ा कारण एमएलसी चुनाव में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग का होना था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई विधायक पहले गुजरात फिर असम चले गए थे। यह सियासी ड्रामा कई दिनों तक चला, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने 29 जून 2022 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से 30 जून 2022 को महाराष्ट्र के सीएम बन गए।
अब महाराष्ट्र में 20 नवंबर को विधानसभा 2024 के चुनाव होने है
इसके करीब 1 साल बाद महाराष्ट्र की सियासी में एक बड़ी उठापटक हुई। अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी का एक समूह बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शामिल हो गया। इसके बाद अजित पवार को महायुती गठबंधन की सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया। बता दें कि इन तीनो(बीजेपी, शिवसेना और NCP) के गठबंधन को महायुती गठबंधन कहा जाता है। अजित पवार के साथ NCPके कुल 8 विधायकों ने महायुती सरकार में मंत्री पद की शपथ ली थी।
इस तरह से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजो के बाद राज्य में सियासी उठापटक के कारण 3 मुख्यमंत्री का कार्यकाल देखने को मिला, जिसमे से एकनाथ शिंदे अभी भी राज्य केमुख्यमंत्री बने हुए हैं। अब महाराष्ट्र में 20 नवंबर 2024 को विधानसभा 2024 के चुनाव होने है। जिसके नतीजे 23 नवंबर 2024 को चुनाव आयोग जारी कर देगा। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि इसबार किसकी सरकार बनती है और कौन राज्य का सीएम बनता है।





