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भारतीय संस्कृति की नींव हैं गुरुकुल : डॉ. मोक्षराज

चित्तौडग़ढ़, 05 अप्रैल (हि.स.)। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय राजदूतावास में प्रथम सांस्कृतिक राजनयिक एवं भारतीय संस्कृति शिक्षक रहे डॉ. मोक्षराज ने कहा कि विश्वगुरु भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवद्र्धन के प्रमुख आधार गुरुकुल ही थे, गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास होता है। डॉ. मोक्षराज सोमवार को रानी पद्मिनी कन्या गुरुकुल चित्तौडग़ढ़ में आयोजित साधना स्वाध्याय शिविर में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही अनगिनत विदेशी लोग भी ज्ञान-विज्ञान, कला-संस्कृति व अध्यात्म की शिक्षा लेने भारत आते रहे हैं। कालांतर में अंग्रेजों ने भारत पर सदियों तक शासन करने के मनोरोग के चलते यहां की शिक्षा प्रणाली को लॉर्ड मैकाले के नेतृत्व में नष्ट भ्रष्ट कर दिया था। इन विदेशी षड्यंत्रों को भांप कर आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती व उनके अनन्य शिष्य स्वामी श्रद्धानंद ने पुन: गुरुकुलीय व्यवस्था आरंभ की थी। साधना शिविर का संयोजन वैदिक मिशन मुंबई के अध्यक्ष डॉक्टर सोमदेव शास्त्री ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीववर्धन शास्त्री ने की। कार्यक्रम में आचार्य कर्मवीर, पं. नरेशदत्त, पं. नरेंद्र दत्त भजनोपदेशक, आचार्या नर्मदा आचार्या अनुसुईया तथा देवेंद्र शेखावत तथा आचार्य चंद्रदेव, विक्रम आर्य, सुधीर यादव आदि प्रमुख मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर

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