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Sunday, March 22, 2026
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CJI सूर्यकांत का बड़ा प्लान: सुप्रीम कोर्ट को बनाएंगे आम लोगों के लिए आसान, बताए दो फ्यूचर प्लान

देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर अपना फ्यूचर प्लान साफ कर दिया है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर अपना फ्यूचर प्लान साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या को कम करना है, ताकि आम लोगों को जल्दी न्याय मिल सके। मध्यस्थता और मुकदमेबाजी होंगे दो अचूक हथियार। एक कार्यक्रम में बोलते हुए CJI सूर्यकांत ने बताया कि वह ‘मध्यस्थता’ (Mediation) को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं साथ ही मुकदमेबाजी (Litigation) को भी और प्रभावी बनाना चाहते हैं उनका कहना है कि इन दोनों तरीकों के जरिए केसों का जल्दी निपटारा किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि वे CJI बनने से पहले ही इस सिस्टम पर काम कर रहे थे।

राष्ट्रीय न्यायिक नीति पर होगा काम

CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता होगी मामलों के निपटारे के लिए तय समयसीमा लंबित मामलों का तेजी से समाधान, एक मजबूत राष्ट्रीय न्यायिक नीति तैयार करना। उन्होंने कहा कि बीते 6 महीनों में उन्होंने एक मध्यस्थता मिशन की शुरुआत भी की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मामले कोर्ट के बाहर ही सुलझाए जा सकें। सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए भी है।CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि हम यह संदेश देना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ बड़े लोगों के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए भी है। उन्होंने बताया कि जिला अदालतों को और मजबूत करने के लिए ज्यूडिशियल एकेडमी हाईकोर्ट के जरिए न्यायिक अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी। ताकि केस जल्दी निपट सकें और समय की बर्बादी न हो।

डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर अपराध बड़ी चुनौती

CJI ने कहा कि आज के समय में न्यायपालिका के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं डिजिटल अरेस्ट, साइबर क्राइम ऑनलाइन ठगी और अपराध। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पीड़ित भारत में हो सकता है और अपराधी विदेश के किसी द्वीप पर बैठा हो सकता है। इसलिए जजों और अधिकारियों को लगातार नई तकनीक की ट्रेनिंग देना जरूरी है।

आम आदमी कैसे जा सकता है सीधे सुप्रीम कोर्ट?

बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि अगर आपके मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) का उल्लंघन होता है, तो आप सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। आप अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट पिटीशन दाखिल कर सकते हैं, जैसे हैबियस कॉर्पस, मंडामस, प्रोहिबिशन, क्वो वारंटो, सर्टियोरारी यह आपका संवैधानिक अधिकार है, इसे कोई नहीं रोक सकता।

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