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Friday, March 20, 2026
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CM नीतीश कुमार की चुप्पी से JDU में अशोक चौधरी की मुश्किलें बढ़ीं, पार्टी के अंदर उठ रहे हैं सवाल

बिहार में इन दिनों चुनाव से पहले राजनीतिक महौल गरमा गया है। नेताओं में आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर लगातार जारी है। सीएम नीतीश कुमार के मंत्री पर प्रशांत किशोर ने गंगीर आरोप लगाए है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क। बिहार की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार सरकार के सीनियर मंत्री अशोक चौधरी, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय पर भ्रष्टाचार और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी गलियारे में तनाव और चर्चा बढ़ गई है।

खासकर अशोक चौधरी पर लगे 200 करोड़ की जमीन खरीद के आरोप ने बिहार की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। वहीं, पार्टी नेता और मंत्री पर आरोपों के बावजूद सीएम नीतीश कुमार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि पहले वे आरोप लगने पर अपने मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया करते थे।

19 सितंबर को प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी और उनके परिवार ने पिछले दो वर्षों में 200 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति खरीदी है। उन्होंने इसके दस्तावेज भी पेश किए। इसके बाद से सीएम नीतीश कुमार ने चुप्पी साध रखी है। अशोक चौधरी न केवल बिहार में मंत्री हैं, बल्कि जेडीयू के सीनियर लीडर भी हैं।

क्‍या आरोप के बाद नीतीश कुमार को होगा नुकसान?

ऐसे में कहा जा रहा है कि, बिहार में कुछ ही सप्ताह में चुनाव की संभावना है, ऐसे में पार्टी के दिग्गज नेता पर लगे गंभीर आरोपों पर सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी भारी पड़ सकती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती बरतने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उनकी छवि को यह चुप्पी नुकसान पहुंचा सकती है, जिसका विपक्षी दल फायदा उठा सकते हैं।

प्रशांत किशोर को भेजा नोटिस 

आरोपों के घेरे में आए अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि उनकी सभी संपत्ति और आयकर विवरण सार्वजनिक हैं और कोई गड़बड़ी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर पहले से चले आ रहे मानहानि केस से घबराकर नए आरोप गढ़ रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अशोक चौधरी अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं और पार्टी में उनके समर्थन पर असर पड़ सकता है।

आरोप पर नीतीश कुमार ने साधी चुप्पी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब तक चुप क्यों हैं। आरोपों को उठे 5 दिन हो चुके हैं, लेकिन न तो उन्होंने जांच के आदेश दिए और न ही अपने मंत्री से इस्तीफा लिया। वहीं, पहले वे आरोप लगते ही छह मंत्रियों से इस्तीफा ले चुके थे और लालू यादव से गठबंधन तक तोड़ चुके थे। अब जब उनके सबसे करीबी मंत्री पर 200 करोड़ की संपत्ति खरीद का आरोप है, तो उनकी चुप्पी कई राजनीतिक मायने रखती है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार मंत्रियों पर कार्रवाई से बच रहे हैं, या एनडीए में सियासी मजबूरियों के चलते उनका हाथ बंधा हुआ है?

चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक मुश्किलें

जनसुराज खुलकर मांग कर रही है कि अशोक चौधरी से इस्तीफा लिया जाए, वहीं विपक्ष भी हमलावर है। अगर नीतीश कुमार लंबे समय तक खामोश रहते हैं, तो यह उनकी साफ-सुथरी छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। सियासी हलकों में चर्चा है कि उनकी चुप्पी एनडीए के भीतर भी असहजता पैदा कर सकती है। भाजपा के नेताओं पर भी आरोप लगे हैं, ऐसे में अगर मुख्यमंत्री कार्रवाई नहीं करते, तो विपक्ष इसे विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगा।

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