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Thursday, March 12, 2026
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कोर्टरूम ड्रामा से भरपूर ये फिल्में दर्शकों को कर गईं हैरान, देखिए ऐसी टॉप Movies की लिस्ट

कोर्टरूम ड्रामा फिल्में हमेशा दिलचस्प होती हैं क्योंकि इनमें न्याय, तर्क और सच के लिए लड़ाई दिखाई जाती है। भारत में भी कई ऐसी फिल्में बनी हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । पंकज त्रिपाठी की वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस’ का नया सीजन जल्द ही आने वाला हैं इसका प्रोमो भी आ चूका हैं। सीरीज में वो माधव मिश्रा के किरदार में नजर आएंगे। सीरीज की कहानी छोटे शहर के एक विचित्र वकील है जो बड़ा बनने की कोशिश कर रहा है। अब फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे है। लेकिन आपको देब की इसके पहले भी कई सीरीज और फिल्म बानी है जिसमे कोर्टरूम ड्रामा दिखाया गया हैं। तो चलिए उसके बारे में जानते हैं।  

दामिनी

“तारीख पर तारीख!” सनी देओल का यह गूंजता हुआ डायलॉग आज भी बॉलीवुड के सबसे यादगार डायलॉग्स में गिना जाता है। फिल्म दामिनी सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि न्याय के लिए लड़ती एक साहसी महिला की दास्तान है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दे को बड़ी गंभीरता से उठाती है। कहानी दामिनी नाम की एक महिला की है, जो अपने ही परिवार के खिलाफ खड़ी होती है, जब वह अपने देवर और उसके दोस्तों पर अपनी नौकरानी के साथ बलात्कार का आरोप लगाती है। न्याय पाने की इस जंग में कोर्टरूम की बहसें, वकीलों की दलीलें और सामाजिक दबाव, सबकुछ फिल्म में बखूबी दिखाया गया है। दामिनी न सिर्फ एक सशक्त कोर्टरूम ड्रामा है, बल्कि यह उन गिनी-चुनी फिल्मों में से है जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों का भरपूर सराहना मिली।

पिंक

2016 में रिलीज हुई पिंक सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक जरूरी सामाजिक संदेश थी, जिसने महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में सशक्त कदम उठाया। अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों से सजी इस फिल्म ने साफ शब्दों में बताया “नो मीन्स नो”। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक बुजुर्ग लेकिन तेज-तर्रार वकील दीपक सहगल की भूमिका निभाई, जो तीन युवतियों के लिए अदालत में लड़ते हैं। पिंक में कोर्टरूम बहसों के जरिए सिर्फ बलात्कार जैसे गंभीर विषय को नहीं, बल्कि समाज में गहराई तक जमी उस पुरुषवादी मानसिकता को भी चुनौती दी गई है, जो महिलाओं के चरित्र का आंकलन उनके पहनावे या रहन-सहन से करती है।

मुल्क

अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित मुल्क 2018 की एक दमदार कोर्टरूम ड्रामा है, जो धार्मिक भेदभाव और सामाजिक पूर्वाग्रहों पर तीखा प्रहार करती है। यह फिल्म एक मुस्लिम परिवार की कहानी है, जो अचानक एक गहरे संकट में फंस जाता है, जब उनके घर के एक सदस्य पर आतंकवाद से संबंध रखने का आरोप लगता है। एक व्यक्ति की गलती के कारण पूरा परिवार शक के घेरे में आ जाता है और उन्हें अपने ही देश में अपनी वफादारी और असल पहचान साबित करनी पड़ती है। ऋषि कपूर, तापसी पन्नू और मनोज पाहवा की शानदार अदाकारी से सजी इस फिल्म में अदालत का हर दृश्य एक सवाल उठाता है कि क्या धर्म के आधार पर किसी की देशभक्ति पर सवाल उठाना न्याय है? 

सेक्शन 375 

2019 में रिलीज हुई सेक्शन 375 एक ऐसी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है, जो न्याय, नैतिकता और कानून की सीमाओं के बीच उलझे एक संवेदनशील मुद्दे को गहराई से छूती है। अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा की प्रमुख भूमिकाओं से सजी यह फिल्म भारतीय दंड संहिता की धारा 375 यानी बलात्कार के कानून पर केंद्रित है। कहानी शुरू होती है एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक पर लगे बलात्कार के आरोप से, जिसे उसकी सहायक कॉस्ट्यूम डिजाइनर द्वारा दर्ज कराया जाता है। निचली अदालत (सेशन कोर्ट) आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुना देती है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता, अपील के लिए यह केस हाईकोर्ट पहुंचता है, जहां से फिल्म की असली कहानी और गूढ़ कोर्टरूम बहसें शुरू होती हैं। सेक्शन 375 का क्लाइमैक्स दर्शकों को झकझोर कर रख देता है, क्योंकि यह सीधे-सीधे यह चुनौती देता है कि सही और न्यायसंगत हमेशा एक जैसे नहीं होते।

जॉली एलएलबी 

2013 में आई सुभाष कपूर की जॉली एलएलबी एक ऐसी कोर्टरूम ड्रामा है, जो हास्य के लिबास में एक गहरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। अरशद वारसी द्वारा निभाया गया जगदीश्वर मिश्रा उर्फ ‘जॉली’ एक ऐसा वकील है, जो न तो मशहूर है, न ही प्रभावशाली, लेकिन उसमें न्याय के लिए लड़ने का जुनून है। फिल्म की कहानी एक हाई-प्रोफाइल हिट एंड रन केस के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें एक रसूखदार व्यक्ति को बचाने के लिए कानून का मजाक उड़ाया जा रहा होता है। जॉली एलएलबी कोर्टरूम में चलने वाले दिलचस्प बहसों और व्यंग्यात्मक दृश्यों के साथ गंभीर सामाजिक संदेश भी देती है।

जॉली एलएलबी 2

2017 में रिलीज हुई जॉली एलएलबी 2 अपने पहले भाग की सफलता के बाद आई, लेकिन यह सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि एक नई कहानी, नया मुद्दा और नया हीरो लेकर आई। इस बार मुख्य भूमिका में थे अक्षय कुमार, जिन्होंने लखनऊ के वकील जगदीश मिश्रा उर्फ ‘जॉली’ का किरदार निभाया। जो एक चालाक लेकिन भीतर से संवेदनशील और न्यायप्रिय इंसान है। फिल्म की कहानी एक फर्जी एनकाउंटर पर आधारित है, जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति को आतंकवादी बताकर मार दिया जाता है। जॉली एलएलबी 2 न सिर्फ एक मनोरंजक कोर्टरूम ड्रामा है, बल्कि यह एक ऐसा आईना है, जो कानून और इंसाफ के बीच मौजूद खामियों को बेबाकी से सामने रखता है।

ओह माय गॉड

ओह माय गॉड एक ऐसी अनोखी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है, जो हास्य, व्यंग्य और तीखे सामाजिक प्रश्नों का अनूठा मिश्रण पेश करती है। 2012 में रिलीज हुई इस फिल्म में परेश रावल ने कांजी मेहता नामक एक नास्तिक व्यापारी की भूमिका निभाई है, जो एक दिन अपने जीवन का सबसे अनोखा केस दायर करता है भगवान के खिलाफ। ओह माय गॉड सिर्फ एक मनोरंजक फिल्म नहीं है, यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी है कि क्या धर्म व्यापार बन चुका है। कोर्ट में चलने वाले दिलचस्प बहसों के साथ-साथ फिल्म धर्म, आस्था और पाखंड पर करारा व्यंग्य करती है।

ओह माय गॉड 2

ओह माय गॉड 2 केवल अपने पहले भाग की विरासत को आगे नहीं बढ़ाती, बल्कि एक और जरूरी सामाजिक मुद्दे को केंद्र में लाकर भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा देती है। इस बार फिल्म की कहानी धर्म बनाम तर्क नहीं, बल्कि यौन शिक्षा जैसे उपेक्षित लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है। अक्षय कुमार, जो इस बार भगवान शिव के दूत के रूप में नजर आते हैं, और पंकज त्रिपाठी, जो एक सीधे-सादे पिता की भूमिका निभाते है। फिल्म में हास्य के साथ-साथ भावनात्मक गहराई और विचारोत्तेजक संवाद हैं।

सिर्फ एक बंदा काफी है

2023 में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी 5 पर रिलीज हुई “सिर्फ एक बंदा काफी है” एक सच्ची घटना से प्रेरित सशक्त फिल्म है, जो धार्मिक आस्था के नाम पर होने वाले यौन शोषण के भयानक पहलू को उजागर करती है। मनोज बाजपेयी की दमदार अदाकारी से सजी यह फिल्म उन लड़कियों की कहानी कहती है, जिन्हें एक ढोंगी बाबा ने अपना शिकार बनाया। फिल्म की कहानी वास्तविक जीवन की घटनाओं, खासकर बलात्कार के आरोपी आसाराम बापू के मामले से प्रभावित है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चेतावनी है जो इस कुप्रथा और उसके अंधकारमय सच को सामने लाती है।

द ट्रायल 

एक्ट्रेस काजोल की सीरीज ‘द ट्रायल’ साल 2024 में आई थी। इस कोर्ट रूम ड्रामा में एक्ट्रेस ने नोयोनिका सेनगुप्ता का किरदार निभाया है। यह रॉबर्ट किंग और मिशेल किंग की द गुड वाइफ का रूपांतरण है। यह एक गृहिणी की कहानी है, जो 10 साल बाद अपने पति के गिरफ्तार होने पर अपने परिवार का समर्थन करने के लिए अपने कानूनी करियर में वापस आती है।

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