नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या मामले में गुरुग्राम पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस पर आरोप है कि निकिता सिंघानिया का वेरिफिकेशन करने में देरी की गई। पीजी के केयर टेकर ने बताया कि जब निकिता ने पीजी में रूम लिया तब उसी दिन उसने अपनी ID के साथ सेक्टर-56 थाने में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। बाद में जब अतुल की आत्महत्या का मामला सामने आया तब पुलिस पीजी में पहुंची। पुलिस ने बताया कि संबंधित अधिकारी छुट्टी पर थे इसलिए वेरिफिकेशन में देरी हुई।
निकिता का सामान और गिरफ्तारी
निकिता सिंघानिया जो अतुल सुभाष की पत्नी है बेंगलुरु में अतुल की आत्महत्या के बाद फरार हो गई थी। वह गुरुग्राम के सेक्टर-57 स्थित एक लग्जरी पीजी में रहने आई थी लेकिन वहां सामान रखने के बाद वह नहीं आई। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था और उसे ट्रैक करने के लिए उसकी कॉल लोकेशन का इस्तेमाल किया। आखिरकार शनिवार को बेंगलुरु पुलिस ने निकिता को गिरफ्तार कर लिया।
निकिता की गिरफ्तारी और परिवार का फरार होना
निकिता की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार के सदस्य जिनमें उसका भाई और मां भी शामिल थे फरार हो गए थे। बेंगलुरु पुलिस ने इनकी तलाश शुरू की और उन्हें प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया। निकिता, उसके भाई अनुराग, और मां निशा को दो हफ्ते की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। पुलिस ने निकिता के चाचा को भी खोजा लेकिन वह अभी फरार हैं।
निकिता का बयान
निकिता ने पुलिस के सामने दावा किया कि वह कभी अतुल को परेशान नहीं करती थी बल्कि अतुल उसे परेशान करता था। उसने यह भी कहा कि अगर उसे पैसे की जरूरत होती तो वह बेंगलुरु छोड़कर नहीं आती।
अतुल सुभाष की आत्महत्या
9 दिसंबर को अतुल सुभाष ने बेंगलुरु में अपने फ्लैट में सुसाइड नोट और वीडियो बना कर आत्महत्या कर ली थी। अतुल के परिवार ने निकिता और उसके परिवार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।





