नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बढ़ती मंहगाई न सिर्फ मध्यम वर्ग बल्कि लोअर और हाई क्लास को भी प्रभावित तक रही है। ऐसे में सभी वर्ग के लोगों की नजरें 1 फरवरी 2025 की तारीख पर जा टिकी हैं। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट जारी किया जाएगा। टैक्सपेयर्स को इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि उन्हें टैक्ट से कुछ राहत मिलेगी जो उनकी आर्थिक स्थिति में मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा। जबकि सरकार का फोकस इस बात पर रहेगा कि साल 2047 तक भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने पर भारत आर्थिक शक्ति बनकर उभरे। आइए जानते हैं कि कौन से ऐसे 5 फैसले टैक्सपेयर्स को राहत दे सकते हैं।
बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट में बदलाव संभव
बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट को लेकर भी बड़ा ऐलान किया जा सकता है। साल 2024 के बजट में नई रीजीम में यह लिमिट 50 हजार रुपये बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई थी। हालांकि अब इसमें 2 लाख रुपये की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों के हाथ में पैसे सेव रखने की स्थिति में यह एक निर्णायक कदम होगा।
सेक्शन 80सी की लिमिट में बढ़ोतरी हो सकती है
साल 2014 से सेक्शन 80सी लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि इसमें साल 2025 में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी की जा सकती है। अभी तक यह लिमिट 1.5 लाख रुपये है जिसे अब 2 लाख रुपये किया जा सकता है।
गिफ्ट टैक्स में भी दी जा सकती है छूट
आप जानते ही होंगे कि अगर आप किसी को 50 हजार रुपये से ज्यादा की कीमत का गिफ्ट देने चाहते हैं तो आपको उसपर टैक्स चुकाना पड़ता था। कई सालों से यह स्थिति लगातार बनी हुई है। हालांकि 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण इस पर बड़ा ऐलान करते हुए 50 हजार का इजाफा कर सकती हैं। इसकी टैक्स फ्री कीमत को 1 लाख रुपये करने से आमजनों को लाभ मिलेगा।
रोजगार को गति देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं
केंद्र सरकार स्टार्टअप्स और MSME को बढ़ावा देने के लिए अहम ऐलान कर सकती है। AI-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए कौशल पहल को बढ़ाने, डिजिटल समाधानों के जरिए अनुपालन को सरल बनाने, हाइब्रिड कार्य मॉडल को बढ़ावा देने और एमप्लोई वेलफेयर को प्राथमिकता देने के लिए सपोर्ट दिया जाएगा।
रियल एस्टेट सेक्टर में भी आ सकती है बहार
रियल एस्टेट सेक्टर को प्रगतिशील सुधारों की उम्मीद है, जिससे घर खरीदने वालों और उद्योग को लाभ होगा। प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के अनुरूप, विशेषज्ञों ने होम लोन पर ब्याज भुगतान पर कर छूट की सीमा को मौजूदा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।





