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Friday, March 6, 2026
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Gold vs Nifty : सोना दे रहा निफ्टी से कहीं बेहतर रिटर्न, आगे के आसार भी जान लें, फिर लगाएं पैसे

Gold vs Nifty 50 : इस साल सोने की कीमतों में तेजी का माहौल है। 01 जनवरी से अब तक सोने में मिले रिटर्न ने निफ्टी 50 को पीछे छोड़ा है।

नई दिल्ली, रफ्तार। निवेश के लिहाज से सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सोने का रिटर्न इक्विटी इनवेस्टमेंट से बेहतर हो गया है। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेवल पर सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बहुत बढ़ी है। दरअसल, सोने के दामों में मौजूदा कैलेंडर ईयर में आई मजबूती से रिटर्न के मामले में शेयर मार्केट के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 पीछे रह गया है। 01 जनवरी से 30 जून 2024 के बीच Nifty 50 में 10.4 प्रतिशत तेजी दिखी। इसी इंडेक्स का साल की शुरुआत से अब तक (YTD) का रिटर्न 11.9 फीसदी है। सोने का 6 महीनों का रिटर्न 18 फीसदी और साल की शुरुआत से अब तक (YTD) का रिटर्न 14.78 फीसदी है। ग्लोबल मार्केट में भी सोने में 13 फीसदी की तेजी दिखी।

दुनिया भर में बढ़ा सोने में निवेश का रुझान

बता दें, सोने में तेजी के बीच पूरी दुनिया में गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETF) में निवेश का रुझान बढ़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि जून में लगातार दूसरे महीने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में पॉजिटिव इनफ्लो दिखा। जून में इनफ्लो 1.4 अरब डॉलर का रहा। कैलेंडर ईयर की पहली छमाही के दौरान एशियन गोल्ड ईटीएफ में कुल मिलाकर 3 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश दिखा। सोने में यह तेजी ऐसे दौर में दिखी है, जब अधिकांश देशों की ग्रोथ रेट कमजोर हुई है। जोखिम से बचने वाले निवेशक सोने की तरफ आकर्षित हुए हैं। इस तेजी में इंटरनेशनल लेवल पर जियो-पोलिटिकल टेंशन के बीच तमाम देशों के सेंट्रल बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी का भी बड़ा हाथ है। सोने को शेयर बाजार की तुलना में हमेशा अधिक सुरक्षित निवेश कहा गया है। 

इन कारणों से सोने की बढ़ी रहेगी कीमत

फिलहाल सोने की कीमतें घरेलू और ग्लोबल बाजारों में रिकॉर्ड हाई के करीब हैं। बता दें, जियो-पोलिटकल टेंशन के कारण बढ़ी सेफ हेवन इनवेस्टमेंट वाली डिमांड अभी रहेगी। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच आपसी तनाव कायम रहने की आशंका है। इजरायल का फिलिस्तीन पर हमला या यूक्रेन और रूस की जंग, उनके भी थमने के संकेत नहीं हैं। अगर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करता है तो सोने की मांग को और बूस्ट मिल सकता है।

सोने को प्रभावित करते हैं ये फैक्टर

सोना ऐसा एसेट है, जिसमें निवेश पर ब्याज नहीं मिलता। लिहाजा, जब ब्याज दरें कम होती हैं तो सोने में निवेश तुलनात्मक रूप से और आकर्षक होता है। वैसे, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि यूएस फेड वाकई ब्याज दरों में कटौती करेगा या नहीं, लेकिन उसके इस दिशा में कदम उठाने की उम्मीद बढ़ती दिख रही है। 31 जुलाई को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की अगली बैठक होगी। पिछले हफ्ते अमेरिका के मैक्रो इकनॉमिक डेटा में खराब आर्थिक प्रदर्शन के संकेत मिलने के बाद इन उम्मीदों को ताकत मिली है कि सितंबर तक ब्याज दरों में राहत मिलेगी। अमेरिका की खुदरा महंगाई दर के आंकड़े भी जारी होंगे, जिनका रेट कटौती के फैसले और उसकी टाइमिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में सोना में निवेश की दिलचस्पी रखने वालों को यूएस फेड के फैसलों और उसके चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयानों पर नजर रखनी चाहिए। यूएस बॉन्ड यील्ड और यूएस डॉलर के एक्सचेंज रेट में बदलावों का असर भी सोने पर पड़ता है। अगर, दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने गोल्ड की खरीदारी कम की तो इससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। ये तमाम फैक्टर सोने की मांग और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

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