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Thursday, April 2, 2026
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1 या 2 अप्रैल कब मनाई जाएगी Hanuman Jayanti? जानें सही तारीख और पूजा विधि

Hanuman Jayanti 2026 अप्रैल में कब है? जानें इसकी सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि ताकि आपको मिले बजरंगबली का आशीर्वाद।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) का पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का मनाया जाता है। हालांकि, चैत्र मास में आने वाली हनुमान जयंती मुख्य रुप से दक्षिण भारत में मनाई जाती है। इस दिन लोग हनुमान जी की पूजा अर्चन करते हैं उनका व्रत रहते हैं। लेकिन इस बार लोग इसकी डेट को लेकर कन्फुज हो रहे है। तो चलिए इसकी सही जानकारी आपको देते हैं कि किस दिन ये पर्व मनाया जाएगा।

इस दिन मनाई जाएगी हनुमान जयंती

चैत्र पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह में 7 बजकर 2 मिनट पर होगा और पूर्णिमा तिथि का समापन 2 अप्रैल को सुबह में 7 बजकर 42 मिनट पर होगा। सूर्योदय व्यापनी तिथि 2 अप्रैल को सुबह में 7 बजकर 42 मिनट पर होने के कारण हनुमान जयंती का पर्व 2 अप्रैल को ही मनाया जाएगी। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ हनुमान जी की पूजा करते हैं और उनसे शक्ति, साहस और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं।

पूजा विधि

हनुमान जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।अब पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की प्रतिमा उसपर स्थापित करें।उन्हें लाल फूल, सिंदूर, चमेली का तेल और गुड़-चना अर्पित करें।इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।ऐसा माना जाता है कि बजरंगबली को चोला आर्पित करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। इसलिए इस दिन चोला जरूर चढ़ाएं।

हनुमान जी का मंत्र

इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जाप करने से विशेष फल मिलता है। हनुमान जी के गायत्री मंत्र का जप भी आप कर सकते हैं ओम आंजनेय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत प्रचोदयात्। मान्यता है कि इस मंत्र का जप करने से साहस में वृद्धि होती है।कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान का ध्यान करते हैं।

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर कांपे,
रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनी पुत्र महाबलदायी,
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए,
लंका जारि सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई,
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे,
सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम कारे,
अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुर दल मारे,
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें,
जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई,
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमान जी की आरती गावै,
बसि बैकुंठ परम पद पावै।
लंका विध्वंस किए रघुराई,
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

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