नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत की संसद के ऊपरी सदन Rajya Sabha की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होने जा रहे हैं। ये चुनाव 10 राज्यों में कराए जाएंगे। राज्यसभा को काउंसिल ऑफ स्टेट्स भी कहा जाता है। यह संसद में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। लोकसभा से अलग, राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। उन्हें राज्य की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक वोट देकर चुनते हैं।
संविधान में तय है सीटों का बंटवारा
राज्यसभा सीटों का बंटवारा Constitution of India के चौथे शेड्यूल में बताया गया है। इसमें यह तय किया गया है कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कितने प्रतिनिधि राज्यसभा में जाएंगे। सीटों के बंटवारे का मुख्य आधार राज्य की आबादी होती है। जिन राज्यों की आबादी ज्यादा होती है, उन्हें ज्यादा सीटें दी जाती हैं ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व ठीक से हो सके।
बड़े राज्यों को ज्यादा सीटें
उदाहरण के तौर पर भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य Uttar Pradesh है। इसलिए यहां से राज्यसभा के 31 सदस्य चुने जाते हैं। वहीं छोटे राज्यों जैसे Goa और Sikkim में सिर्फ एक-एक राज्यसभा सीट है।
आबादी के आधार पर तय होता है फॉर्मूला
हालांकि संविधान में सीटों का बंटवारा पहले से तय है, लेकिन सामान्य नियम यह है कि सीटों का निर्धारण आबादी के आधार पर किया जाता है। पहले 50 लाख (5 मिलियन) आबादी तक हर 10 लाख लोगों पर एक सीट दी जाती थी। इसके बाद हर 20 लाख लोगों पर एक अतिरिक्त सीट जोड़ दी जाती थी। हालांकि मौजूदा सीटों का बंटवारा अभी भी 1971 की जनगणना के आधार पर ही है।
क्यों नहीं बदली सीटों की संख्या?
सरकार ने प्रतिनिधित्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए 2026 तक परिसीमन (Delimitation) और सीटों में बदलाव पर रोक लगा दी थी। इसलिए अभी भी राज्यों की राज्यसभा सीटें 1971 की जनगणना के हिसाब से ही तय हैं।
राज्यसभा में कुल कितने सदस्य होते हैं?
संविधान के आर्टिकल 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। फिलहाल सदन की कुल प्रभावी संख्या 245 सदस्य है। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। इन नामित सदस्यों को कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए चुना जाता है। राज्यसभा भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। आबादी के आधार पर सीटों का बंटवारा और राज्य विधानसभाओं के जरिए सदस्यों का चुनाव यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों और जनता दोनों का संतुलित प्रतिनिधित्व संसद में बना रहे।





