बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी छोड़ी तो होगा बड़ा नुकसान! फैसला लेने से पहले जान लें पूरा सच

बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर करने पर पूरी रकम वापस नहीं मिलती और जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है। फैसला लेने से पहले सरेंडर वैल्यू और के फायदे-नुकसान का पूरा आंकलन करना जरूरी है।

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Insurance policy
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नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी छोड़ना आसान फैसला नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर आपकी जेब और भविष्य की सुरक्षा दोनों पर पड़ता है। कई बार आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताएं या गलत प्लानिंग के कारण लोग पॉलिसी बंद करने का सोचते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले पूरी तस्वीर समझना जरूरी है। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने को ‘सरेंडर’ कहा जाता है। इस स्थिति में बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम मिलती है उसे सरेंडर वैल्यू कहा जाता है, जो अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से कम होती है।

जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है

सबसे बड़ा नुकसान यह है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है। यानी भविष्य में किसी अनहोनी की स्थिति में आपके परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। खासकर शुरुआती 2 से 4 साल में पॉलिसी सरेंडर करने पर ज्यादा घाटा होता है, क्योंकि उस समय प्रीमियम का बड़ा हिस्सा एजेंट कमीशन, प्रशासनिक खर्च और अन्य चार्ज में चला जाता है। एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में मिलने वाले भविष्य के बोनस और गारंटीड रिटर्न भी बीच में छोड़ने पर समाप्त हो जाते हैं।

पॉलिसी बंद करने के बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प

हालांकि पूरी तरह पॉलिसी बंद करने के बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प चुना जा सकता है, जिसमें आप आगे प्रीमियम देना बंद कर देते हैं लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। टर्म इंश्योरेंस के मामले में स्थिति अलग है इसमें कोई सेविंग या कैश वैल्यू नहीं होती, इसलिए इसे छोड़ने पर कोई रकम वापस नहीं मिलती, केवल कवरेज खत्म होता है।

कम से कम एक साल का प्रीमियम भरा गया हो

बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे कुछ पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले से बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम भरा गया हो।

पॉलिसी बंद करने से पहले ग्रेस पीरियड और रिवाइवल

पॉलिसी बंद करने से पहले ग्रेस पीरियड और रिवाइवल जैसे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। अक्सर कंपनियां 15 से 30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के साथ लैप्स पॉलिसी दोबारा चालू भी की जा सकती है। इसलिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपनी पॉलिसी के नियम, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और परिवार की सुरक्षा इन सबका संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है