नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की राजनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति के तहत ब्राह्मणों को लुभाने में जुटा है। कोई खुलकर वोटरों को संबोधित कर रहा है, कोई दबी जुबान से, तो कोई खामोशी अपनाकर। इसी बीच, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में भव्य रैली आयोजित कर अपनी रणनीति साफ कर दी। इस रैली में 10 हजार से अधिक ब्राह्मणों ने हिस्सा लिया और ब्राह्मण समाज के सम्मान में नारे लगाए गए जय सुहेलदेव, जय परशुराम।
आजमगढ़ में बदलाव लाना है-राजभर
राजभर ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि सपा के दबदबे वाले क्षेत्र में अब एनडीए की पकड़ मजबूत होगी और आने वाले विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटें उनके पक्ष में आने की संभावना है। राजभर ने ब्राह्मण वोटरों को प्रबुद्ध वर्ग बताते हुए कहा कि यही लोग समाज को दिशा देते हैं और भटके हुए को सही राह दिखाते हैं।
दलित और ब्राह्मण वोटरों को जोड़ने का फॉर्मूला
ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के इस सोशल इंजीनियरिंग 2.0 प्रोजेक्ट में राजनीतिक दल मायावती और अखिलेश यादव भी सक्रिय हैं। बीएसपी की पिछली सफल सोशल इंजीनियरिंग रणनीति में दलित और ब्राह्मण वोटरों को जोड़ने का फॉर्मूला अपनाया गया था। अब ओबीसी-ब्राह्मण गठजोड़ पर जोर दिया जा रहा है। ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि बीजेपी की मदद से वे समाजवादी पार्टी के गढ़ पर धावा बोल रहे हैं और महीने में कई दिन आजमगढ़ में ही रहकर यह काम करेंगे।
ब्राह्मणों के सम्मान के लिए विशेष मंच तैयार किया गया
राजभर ने यूजीसी गाइडलाइंस के विवाद और सुप्रीम कोर्ट के स्टे को भी ब्राह्मण वर्ग के लिए सकारात्मक उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने बताया कि कानून के जरिए न्याय मिलेगा और यह दिखाएगा कि ब्राह्मणों की आवाज सुनी जा रही है। रैली में ब्राह्मणों के सम्मान के लिए विशेष मंच तैयार किया गया और कार्यक्रम के दौरान कई कसीदे पढ़े गए।
बच्चों के लिए तिलक और पूजा का आयोजन किया
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण आबादी लगभग 12 फीसदी है और सवर्णों में सबसे बड़ा समूह माना जाता है। राजनीति की चुनौती यह है कि ब्राह्मण कभी जाति के आधार पर उम्मीदवार या पार्टी चुनते हैं, कभी अन्य कारणों से बंट जाते हैं। इसी कारण राजनीतिक दल लगातार सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दे रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी बटुका बच्चों के लिए तिलक और पूजा का आयोजन किया।
कांग्रेस फिलहाल खामोश है
बीएसपी नेता मायावती भी ब्राह्मणों के लिए सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला फिर से आजमा रही हैं। कांग्रेस फिलहाल खामोश है, लेकिन यूपी में चुनावी गठबंधन और ओबीसी मुहिम के चलते उसकी रणनीति पर नजर बनी हुई है। इस बीच, ओमप्रकाश राजभर और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की अपनी रणनीति तेज कर दी है और 2027 के चुनाव में इसका असर दिखाई देने की संभावना है।





