नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी और दोनों पीड़ित शिष्यों के बयान दर्ज करने के लिए सोमवार से कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने माघ मेला शिविर और कथित घटना स्थल का नक्शा तैयार किया है, जबकि पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ की जाएगी।
हाई-प्रोफाइल जांच
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पांच सदस्यीय स्पेशल टीम गठित की है, जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी भी शामिल हैं। टीम का मुख्य फोकस उन पीड़ितों तक पहुंचना है जिन्होंने माघ मेला शिविर और बाहर खड़ी गाड़ी में यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। मेडिकल और लिखित बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी तय होगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख
एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी ने स्पष्ट किया कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस जो उचित समझेगी, वही करेगी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है।
शिकायतकर्ता के इतिहास पर सवाल
स्वामी ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया, दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम रह चुका है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया दोनों न्यायालयों में निष्पक्ष रूप से पूरी होगी।
राजनीतिक बयान
इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों को स्वामी ने जनता की आवाज बताया और उनका समर्थन किया।
धार्मिक जगत में भी मतभेद और बहस जारी
इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर मतभेद और बहस जारी है। कई धार्मिक और सामाजिक समूह इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिससे स्थानीय समुदाय में चर्चा बढ़ी है। जांच जैसे‑जैसे आगे बढ़ती जा रही है, पुलिस जल्द ही मुख्य बिंदुओं पर कार्रवाई और संभावित आरोपियों के खिलाफ कदम उठाने की दिशा में संकेत दे सकती है





