चोटी खींचना महाअपराध है… बोले ब्रजेश पाठक, शंकराचार्य विवाद के बीच 101 बटुकों को आवास पर बुलाकर किया सम्मान

माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बाद यूपी सरकार डैमेज कंट्रोल के मोड में नजर आ रही है।

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Brajesh Pathak

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बाद यूपी सरकार डैमेज कंट्रोल के मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों को अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया और उनसे आशीर्वाद लिया।

क्या है पूरा विवाद?

प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र स्नान से रोके जाने का मामला सामने आया था। इसी दौरान उनके साथ चल रहे बटुकों की शिखा खींचे जाने की कथित घटना ने तूल पकड़ लिया। इस मुद्दे पर विपक्ष ने यूपी सरकार को घेर लिया था और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे थे।

ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों को क्यों बुलाया?

विवाद बढ़ने के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों को आमंत्रित किया। उन्होंने सभी बटुकों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया, तिलक लगाया और उनकी शिखा का सम्मान करते हुए आशीर्वाद लिया। ब्रजेश पाठक ने इस मौके पर कहा कि शिखा का सम्मान सनातन संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा है। उन्होंने दोहराया कि किसी ब्राह्मण की शिखा को छूना या खींचना बेहद गंभीर अपराध है और यह बड़ा पाप माना जाता है। इससे पहले एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा था कि शिखा के साथ की गई कोई भी बदसलूकी सनातन संस्कृति का अपमान है और ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

विपक्ष के हमलों के बीच सरकार की पहल

माघ मेला विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर था। ऐसे में 101 बटुकों का सम्मान कर ब्रजेश पाठक का यह कदम सरकार के डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे नाराज संत समाज और ब्राह्मण वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। हालांकि सरकार की इस पहल के बाद माहौल कुछ शांत होता दिख रहा है, लेकिन विपक्ष अब भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि यह कदम विवाद को पूरी तरह थाम पाता है या नहीं।