नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) की मोगा रैली के बाद राज्य में दो उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने मंत्रियों और विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें एक अनुसूचित जाति और एक सवर्ण वर्ग से विधायक को डिप्टी सीएम बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। यह बैठक रैली के तुरंत बाद आयोजित की जा रही है, जिससे संकेत मिलते हैं कि पार्टी सामाजिक समीकरण साधने की दिशा में सक्रिय है। AAP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में दलित समुदाय से डिप्टी सीएम बनाने का वादा किया था। अब माना जा रहा है कि पार्टी उस वादे को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है। बैठक में विधायकों की राय लेने के बाद अंतिम फैसला किया जा सकता है।
‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ रैली में शक्ति प्रदर्शन, बड़े चेहरों की मौजूदगी
पंजाब में ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत मोगा के पास किल्ली चहलां गांव में विशाल रैली आयोजित की गई है। इस कार्यक्रम को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद सोशल मीडिया के जरिए रैली में शामिल होने की पुष्टि की है। वह इन दिनों मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल मोहाली में भर्ती हैं। पहले माना जा रहा था कि वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन 16 फरवरी को आई जानकारी के बाद समर्थकों का उत्साह बढ़ गया है। वहीं, राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल रैली को संबोधित करेंगे और उनके साथ पंजाब के मंत्री हरपाल चीमा भी मंच पर रहेंगे। इस आयोजन को पार्टी की ताकत के प्रदर्शन और आगामी चुनावी रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
मोगा का बड़ा सियासी महत्व
मोगा को मालवा क्षेत्र का केंद्रीय बिंदु माना जाता है। यहां से माजहा, मालवा और दोआबा तीनों इलाकों तक राजनीतिक संदेश आसानी से पहुंचता है। यही वजह है कि दल अक्सर बड़े ऐलान या शक्ति प्रदर्शन के लिए इस जिले को चुनते हैं। किसान आंदोलनों और यूनियन गतिविधियों में भी मोगा की सक्रिय भूमिका रही है, जिसने इसे राजनीतिक रूप से और अहम बना दिया है। आम आदमी पार्टी की रैली के बाद प्रस्तावित बैठक को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यहां से संगठनात्मक बदलाव या नई घोषणा के जरिए व्यापक सियासी संकेत दिए जा सकते हैं। मोगा लंबे समय से पंजाब की राजनीति का एक प्रभावशाली केंद्र रहा है, इसलिए यहां होने वाली हलचल को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।





