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सत्ता के लोभ में कांग्रेस, एआईयूडीएफ और वामपंथियों का बेमेल तालमेल : भाजपा

गुवाहाटी, 24 फरवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस, एआईयूडीएफ और वामपंथी दलों के बीच हुए तालमेल को सत्ता के लोभ में किया गया एक बेमेल चुनावी तालमेल करार दिया है। बुधवार को राजधानी के खानापाड़ा स्थित भाजपा के नए चुनाव कार्यालय में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रूपम गोस्वामी तथा पार्टी प्रवक्ता सुभाष दत्त ने विपक्षी दलों के बीच हुए तालमेल को लेकर सीधा-सीधा सवाल उठाया। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि 65 वर्षों के शासनकाल में भ्रष्टाचार, कुशासन, अकर्मण्यता आदि का कीर्तिमान स्थापित करने वाली कांग्रेस पार्टी आज एआईयूडीएफ के साथ मिलकर असम बचाऊं आहक कह रही है, जो बिल्कुल हास्यास्पद है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सत्ता के लिए कांग्रेस, एआईयूडीएफ, आंचलिक गण मोर्चा, असम जातीय परिषद, राइजर दल, वामपंथी पार्टियां आदि जनता को भ्रमित करने के जिस कार्य में जुटी हुई है, उससे असम की जनता पूरी तरह वाकिफ है। भाजपा प्रवक्ता गोस्वामी ने कहा कि भाजपा के लाखों की संख्या में सक्रिय कार्यकर्ता राज्य के चप्पे-चप्पे पर मौजूद हैं। पन्ना प्रमुख से लेकर प्रदेश और केंद्र स्तर तक भाजपा नेताओं की चाक-चौबंद व्यवस्था है। ऐसे में सत्तालोलुप पार्टियों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार का कोई असर होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता ने इन सभी को देखा है। उन्होंने कहा कि असम के विकास के लिए केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के साथ ही एक से बढ़कर एक योजनाएं शुरू हुईं। विपक्षी पार्टियां असम की केंद्र सरकार द्वारा उपेक्षा का आरोप लगा रही है, जो गलत है। ग्यारहवें वित्त आयोग के जरिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने असम को 97 हजार करोड़ रुपये ही दिए थे। जबकि, नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 14वें वित्त आयोग के जरिए सवा लाख करोड़ रुपए से अधिक असम को दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐतिहासिक तरीके से विकास के कार्य हुए हैं। गांव से लेकर शहर तक काम ही काम दिख रहा है। चाहे वह महिला कल्याण की बात हो या फिर कृषक कल्याण की अथवा चाय मजदूरों की समस्याओं की- हर स्तर पर भाजपा की सरकार ने कार्य किया है और लोगों को राहत दिलाई है। उन्होंने कहा कि असम आंदोलन का समर्थन करने वाली एकमात्र राजनीतिक पार्टी भाजपा ही थी। भाजपा ने असम आंदोलन के दौरान हुए चुनाव का बहिष्कार किया था। जबकि, हिरेन गोहाईं जैसे वामपंथी नेता असम आंदोलन का विरोध कर रहे थे। ये वामपंथी नेता कांग्रेस से मिलकर उन दिनों के असम आंदोलन के क्रांतिकारियों को मरवा रहे थे। असम आंदोलन के दौरान शहीद हुए 855 शहीदों की हत्या करवाने वाले यही लोग हैं। आज एक बार फिर वे सभी शक्तियां आपस में मिल गई हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जनता सब कुछ समझती है। यही वजह है कि भाजपा के कार्यक्रमों में स्वतःस्फूर्त जनसैलाब उमड़ पड़ता है। पत्रकार सम्मेलन के दौरान रूपम गोस्वामी और सुभाष दत्त ने जहां इन पार्टियों को जमकर आलोचना की, वहीं भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इस दौरान किए गए कई उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा की। इन नेताओं ने पत्रकारों के कई सवालों के सीधे-सीधे उत्तर दिए। हिन्दुस्थान समाचार/ श्रीप्रकाश

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