नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। संगीतकार एआर रहमान के हालिया बयान के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें अब पहले की तुलना में काम कम मिल रहा है। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल से बीजेपी के पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने ऐसी टिप्पणी की, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है।
अर्जुन सिंह ने एआर रहमान की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि वह उनके संगीत का सम्मान करते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने धर्म से जुड़ा विवादित बयान भी दे दिया। उन्होंने दावा किया कि एआर रहमान ने फिल्म इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया था और अब उन्हें सनातन धर्म में वापस लौटना चाहिए। इस बयान के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई।
”आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का प्रभाव कम हो रहा है”
पूर्व सांसद ने अपने बयान में बॉलीवुड की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का प्रभाव कम हो रहा है, जबकि साउथ सिनेमा लगातार मजबूत हो रहा है। अर्जुन सिंह के मुताबिक, साउथ फिल्मों की कहानियां और प्रस्तुति दर्शकों को ज्यादा पसंद आ रही हैं, इसी वजह से डब की गई फिल्मों को भी व्यापक दर्शक मिल रहे हैं।
”बॉलीवुड ने धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूरी बना ली है”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बॉलीवुड ने धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूरी बना ली है, जिसका असर अब फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति पर दिखाई दे रहा है। अर्जुन सिंह ने आगे कहा कि आने वाले समय में भारत की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी, लेकिन उनके इस बयान को कई लोगों ने भड़काऊ और अनावश्यक बताया।
”कलाकारों को अपनी मूल पहचान से जुड़े रहना चाहिए”
इस विवाद पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इससे पहले भजन गायक अनूप जलोटा भी एआर रहमान के बयान पर अपनी राय रख चुके हैं, जिसपर अनूप जलोटा ने कहा कि, अगर एआर रहमान सनातन धर्म में लौट आते हैं तो उन्हें फिर से काम मिलने लगेगा। जलोटा ने यह भी कहा कि भारतीय संगीत और संस्कृति की जड़ें सनातन परंपरा से जुड़ी हैं और कलाकारों को अपनी मूल पहचान से जुड़े रहना चाहिए।जिस पर भी सोशल मीडिया में चर्चा हुई थी। फिलहाल, एआर रहमान की ओर से इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।





