नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। इस प्रकरण में एक रियल एस्टेट कंपनी के अधिकारी की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक निर्माण स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में कार फंसने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ग्रेटर नोएडा) हेमंत उपाध्याय ने बताया कि मामले में एमजेड विजटाउन प्लानर्स से जुड़े अधिकारी अभय कुमार को हिरासत में लिया गया है। इसके साथ ही गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया है।
इधर, मृतक युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता ने सरकार की त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी के गठन से उन्हें न्याय की उम्मीद मिली है और उनके बेटे की आत्मा को शांति मिली है। उन्होंने मीडिया का भी आभार जताते हुए कहा कि मामले को सही मंच पर उठाया गया, जिससे प्रशासन तक बात पहुंच सकी।
राजकुमार मेहता ने मांग की कि जिस गड्ढे में पानी भरा हुआ है, वहां प्रशासन तत्काल प्रभाव से अस्थायी और स्थायी समाधान करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। उनका कहना है कि सरकार से उन्हें पूरा भरोसा है और आगे भी उचित सहयोग मिलने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की शनिवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान चली गई। घने कोहरे के बीच उनकी कार फिसल गई और नाले के पास निर्माणाधीन एक व्यावसायिक परियोजना के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में जा गिरी। बताया गया कि निर्माण स्थल पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी संकेत, जिससे यह हादसा और भी गंभीर हो गया।
इस मामले में मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर दो रियल एस्टेट कंपनियों एमजेड विजटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं और जिम्मेदार लोगों से जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
पुलिस कार्रवाई के तहत एमजेड विजटाउन प्लानर्स से जुड़े एक अधिकारी अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, मंगलवार दोपहर तक दूसरी कंपनी लोटस ग्रीन्स के खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई को लेकर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। यह मामला अब केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि निर्माण स्थलों की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।





