नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ग्रेटर नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत की बेटियों ने कमाल कर दिखाया। शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुए मुकाबलों में मीनाक्षी हुड्डा, अरुंधति और प्रीति ने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। हरियाणा के रोहतक जिले के छोटे से गाँव रुड़की की रहने वाली मीनाक्षी ने देश को पहला गोल्ड दिलाकर इतिहास रच दिया।
”ऑटो ने मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया”
जीत के बाद भावुक मीनाक्षी ने कहा, “परिवार की हालत अच्छी होने के बाद भी पिता ने ऑटो चलाना नहीं छोड़ा। आज मैं जो भी हूँ, ऑटो की वजह से हूँ। उसी से मैदान तक का सफर तय हुआ। उनके पिता ने समाज की बातों को नजरअंदाज कर बेटी को आगे बढ़ने दिया। मुश्किलों से लड़कर जीता सोना शुरुआत में गांव वालों के ताने लड़कियों को बॉक्सिंग सिखाने पर सवाल चोट लगने पर शादी न होने जैसी बातें लेकिन मीनाक्षी के पिता ने कहा, “तुम बस मेहनत करो, एक दिन दुनिया तुम्हें पहचानेगी। आज वही लोग अपने बच्चों को बॉक्सिंग सिखाने की सलाह लेने आते हैं।
अब तक की उपलब्धियां
मीनाक्षी मौजूदा समय में आईटीबीपी में तैनात हैं। उन्होंने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन किया 2022 राष्ट्रीय चैंपियनशिप, स्वर्ण पदक एशियन चैंपियनशिप, रजत पदक सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप, रजत पदक अब वर्ल्ड बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल गांव की बेटियों के लिए प्रेरणा आज मीनाक्षी की जीत से गाँव की सोच बदली है। लड़कियाँ खेलों में आगे बढ़ रही हैं, परिवार उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं। मीनाक्षी कहती हैं अगर परिवार साथ दे तो कोई सपना बड़ा नहीं होता। यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं एक पिता के संघर्ष और बेटी के सपनों की जीत है।





