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Monday, March 2, 2026
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ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाई रोक, पेरेंट्स को नहीं देनी होगी पेनाल्टी

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम यूट्यूब और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सोशल मीडिया के बेतहाशा बढ़ते प्रभाव और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक असर को देखते हुए, ऑस्ट्रेलिया ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। जहां ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार से एक ऐतिहासिक कानून लागू कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह कानून लागू करने के साथ ही, ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने इतनी कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया का उपयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया है।

सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश

सरकार का यह निर्णय महज़ एक सलाह नहीं, बल्कि एक कड़ा आदेश है। देश में उपयोग हो रहे 10 सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि रात 12 बजे से 16 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को उनका एक्सेस न मिले।

सरकार ने ऑर्डर दिया है कि देश में उपयोग हो रहे 10 सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रात 12 बजे से 16 साल से कम उम्र के बच्चों का एक्सेस पूरी तरह से ब्लॉक करना होगा। ऑर्डर का पालन न करने वाली कंपनियों पर नए कानून के तहत 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 296 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

पेरेंट्स और बच्चों पर कोई पेनाल्टी नहीं

कानून की सबसे दिलचस्प और राहत भरी बात यह है कि इस प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए पेरेंट्स या बच्चों पर कोई पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। सरकार ने सारा दारोमदार और ज़िम्मेदारी सीधे सोशल मीडिया कंपनियों पर डाल दी है। उन्हें ही उन्नत तकनीक और सत्यापन प्रक्रियाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिग प्लेटफॉर्म पर प्रवेश न कर सकें। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को असुरक्षित सामग्री, अवांछित खतरों और सोशल मीडिया की नकारात्मकताओं से दूर रखकर उनके ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई

इस कानून के लागू होने के बाद आम जनता और सोशल मीडिया कंपनियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। जहां बड़ी टेक कंपनियां और फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के समर्थक इस कदम की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कई पैरेंट्स सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए सही कदम बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग कम उम्र के बच्चों पर मानसिक और शारीरिक प्रभाव डाल सकता है। इस नए कानून से बच्चों की असुरक्षित और अवांछित सामग्री से सुरक्षा बढ़ेगी और उन्हें सोशल मीडिया की नकारात्मकताओं से दूर रखा जा सकेगा।

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