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Monday, March 16, 2026
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कपिल देव का बयान: आधुनिक क्रिकेट में गौतम गंभीर को कोच नहीं, मैनेजर माना जाए

कपिल देव ने कहा कि आधुनिक क्रिकेट में हेड कोच तकनीकी से ज्यादा टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बनाए रखने पर ध्यान दें।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारत की 0-2 की करारी हार के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की रणनीति और फैसलों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच भारत को 1983 में विश्व कप जिताने वाले कप्तान कपिल देव ने आधुनिक क्रिकेट में कोच की भूमिका को लेकर बड़ा और सीधा बयान देकर बहस छेड़ दी है। कपिल देव का मानना है कि आज के दौर में मुख्य कोच का काम तकनीकी ट्रेनिंग से ज्यादा खिलाड़ियों को सही तरीके से मैनेज करना है।

कोच शब्द को गलत तरीके से समझा जा रहा है: कपिल देव

कोलकाता में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के आईसीसी शताब्दी सत्र के दौरान कपिल देव ने कहा कि मौजूदा क्रिकेट में ‘कोच’ शब्द का अर्थ बदल चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आज जिसे हम कोच कहते हैं, वह शब्द बहुत आम हो गया है। गौतम गंभीर कोच नहीं हो सकते, वह एक मैनेजर हो सकते हैं। कोच वह होता है, जिससे मैंने स्कूल और कॉलेज में क्रिकेट सीखी थी, जो मुझे तकनीक सिखाता था और मेरी गलतियां सुधारता था।”

हर विभाग का विशेषज्ञ कैसे हो सकता है हेड कोच?

कपिल देव ने हेड कोच की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक व्यक्ति सभी विभागों का तकनीकी जानकार कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, गौतम गंभीर लेग स्पिनर या विकेटकीपर को कैसे कोच कर सकते हैं? आज असल जरूरत मैनेज करने की है। कपिल के अनुसार आधुनिक क्रिकेट में टीम मैनेजमेंट, खिलाड़ियों का मनोबल और आत्मविश्वास बनाए रखना सबसे अहम जिम्मेदारी है।

मैनेजर खिलाड़ियों में भरोसा पैदा करता है

कपिल देव ने आगे कहा कि एक अच्छा मैनेजर खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाता है कि वे मैदान पर बेहतर कर सकते हैं। “युवा खिलाड़ी आप पर विश्वास करते हैं और वही आत्मविश्वास उनके खेल में नजर आता है,उन्होंने कहा। कपिल का मानना है कि आज के दबाव भरे क्रिकेट में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रखना कोचिंग से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

टेस्ट हार के बाद गंभीर पर बढ़ी आलोचना

दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम इंडिया के लगातार खिलाड़ियों के रोटेशन, पार्ट-टाइम गेंदबाजों पर निर्भरता और स्पष्ट रणनीति की कमी को लेकर गौतम गंभीर की आलोचना हो रही है। पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में स्थिरता और स्पष्ट योजना जरूरी होती है, जो इस सीरीज में नजर नहीं आई।

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