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केन-बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना के लिए 45 हजार करोड़ रुपये आवंटित

नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना लागू करने के लिए 44,605 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की घोषणा की। यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई के लिए आवश्यक है। इस पर हालांकि पर्यावरणविदों की आलोचनात्मक टिप्पणियां आई हैं। प्रस्तावित केन-बेतवा और अन्य पांच नदियों को जोड़ने वाली परियोजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए वित्तमंत्री ने कहा, केन-बेतवा लिंक परियोजना लागू करने पर 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इसका उद्देश्य किसानों की 9.08 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई करना है। उन्होंने कहा, परियोजना 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति भी प्रदान करेगी, 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगी। कुल आवंटन में से, 4,300 करोड़ रुपये का आवंटन 2021-22 में किया गया था। संशोधित अनुमानित लागत के अनुसार इस 2022-23 के बजट में और 1,400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि दमनगंगा-पिंजाल, पार-तापी-नर्मदा, गोदावरी-कृष्णा, कृष्णा-पेन्नार और पेन्नार-कावेरी नामक पांच नदी लिंक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के मसौदे को भी अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा, लाभार्थी राज्यों के बीच एक बार सहमति बनने के बाद केंद्र कार्यान्वयन मेंसहायता प्रदान करेगा। साल 2014 के बाद, यानी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से नदियों को जोड़ने की परियोजना लंबित रही है। पर्यावरणविदों की चिंता को देखते हुए कैबिनेट ने दिसंबर 2021 में केन बेतवा इंटरलिंकिंग परियोजना के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) को मंजूरी दी थी। ऐसी अन्य परियोजनाओं को अभी वैधानिक मंजूरी नहीं मिली है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के टाइगर प्रोजेक्ट प्रमुख डॉ. प्रणव ने कहा कि आवास क्षेत्रों के बीच अच्छी कनेक्टिविटी के साथ आवास के विशाल पथ परिदृश्य-पैमाने बाघ संरक्षण के लिए आवश्यक हैं। यदि आवासों से समझौता किया जाता है, तो कनेक्टिविटी खराब हो जाती है या बाघों और अन्य वन्यजीवों को प्रदान की जाने वाली सुरक्षा किसी भी तरह से कमजोर हो जाती है। कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री, जयराम रमेश ने ट्वीट किया, बजट एक तरफ जलवायु कार्रवाई और पर्यावरण की रक्षा की बात करता है। दूसरी ओर, यह नदियों को जोड़ने वाली पारिस्थितिक रूप से विनाशकारी परियोजनाओं को आगे बढ़ाता है। बयानबाजी अच्छी लगती है, लेकिन कार्रवाई अधिक मायने रखती है। –आईएएनएस एसजीके/एएनएम

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