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Nirjala Ekadashi 2025: 6 या 7 जून, किस दिन है निर्जला एकादशी? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में विशेष स्‍थान रखती है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में विशेष स्‍थान रखती है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इसे साल की सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशी भी माना जाता है। इस साल ये व्रत विशेष रूप से काफी अहम है, क्योंकि इस बार ये दो दिनों तक मनाया जाएगा। एकादशी तिथि 6 जून 2025 को रात 2:15 बजे शुरू होगी और 7 जून 2025 को सुबह 4:47 बजे खत्‍म होगी। मान्‍यता के अनुसार, व्रत 6 जून 2025 को मनाया जाएगा। वैष्णव सम्प्रदाय के लिए ये 7 जून को भी मनाया जाएगा।

निर्जला एकादशी क्या है?

निर्जला एकादशी का हिंदू धर्म में एक खास मह‍त्‍व है। इसे सबसे कठिन और महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है। ‘निर्जला’ का अर्थ है ‘बिना जल के’, अर्थात इस व्रत में भक्त न तो भोजन करते हैं और न ही पानी ग्रहण करते हैं। ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। 

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी का आपना एक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्‍व है। ये व्रत न केवल भक्तों के शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण में मदद करता है, बल्कि ये भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का भी सशक्त माध्यम है। इस व्रत को रखने से सभी पाप नष्‍ट हो जाते है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निर्जला एकादशी की पूजा विधि-

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4-5 बजे) में स्नान कर लें और स्‍वस्‍थ्‍ वस्‍त्र पहनें, फिर भगवान विष्‍णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन बिना जल और अन्‍न ग्रहण किए व्रत रखें फिर हरि नाम का जप करें और आप कहें कि यह व्रत भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। संकल्प में कहें कि आप ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा के लिए रख रहे हैं। पूजा के लिए चंदन, तुलसी पत्र, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (फल या मिठाई), और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण) तैयार करें।

निर्जला एकादशी की पूजा प्रक्रिया-

भगवान विष्णु को पंचामृत और तुलसी पत्र करें।

विष्णु सहस्रनाम या भगवद गीता का पाठ करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें।

माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें और उन्हें कमल का फूल अर्पित करें।

निर्जला एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।

पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को जल, भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।

अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारणा समय में व्रत तोड़ें। सबसे पहले जल और फिर हल्का भोजन ग्रहण करें।

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