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Budhwar Mantra : कब,कैसे और किसे करना चाहिए गणेश अथर्वशीर्ष पाठ

Ganesh Atharvashirsha Mantra :- गणेश अथर्वशीर्ष पाठ सभी लोगों के लिए लाभकारी है, लेकिन विशेष रूप से दो लोगों को जरूर करना चाहिए !

नई दिल्ली , 06 सितम्बर 2023 : गणेश अथर्वशीर्ष एक शक्तिशाली मंत्र है जो भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करता है। यह मंत्र सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करता है और व्यक्ति को मनोवांछित फल प्राप्त करने में मदद करता है।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने के लिए सबसे पहले एकांत स्थान में बैठ जाएं। अपने सामने गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति रखें। फिर, चंदन, सिंदूर, अक्षत, फूल, धूप, दीप आदि से गणेश जी की पूजा करें। पूजा के बाद, हाथ में जल लेकर गणेश जी से अपने मन की इच्छा बोलें। फिर, गणेश अथर्वशीर्ष मंत्र का जाप शुरू करें। मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • सभी प्रकार के विघ्नों को दूर होता है।

  • बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

  • सभी प्रकार के कष्टों और रोगों से मुक्ति मिलती है।

  • सभी प्रकार के दुःखों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

  • मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

  • जीवन में सुख समृद्धि आती है।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ कौन-कौन से लोग जरूर करें

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ सभी लोगों के लिए लाभकारी है, लेकिन विशेष रूप से दो लोगों को जरूर करना चाहिए:

  • जो लोग किसी भी प्रकार के विघ्नों से परेशान हैं। गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने से सभी प्रकार के विघ्न दूर हो जाते हैं।

  • जो लोग किसी भी प्रकार की परीक्षा या प्रतियोगिता में सफल होना चाहते हैं। गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने से बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति होती है, जो परीक्षा या प्रतियोगिता में सफल होने के लिए आवश्यक है।

यदि आप भी किसी भी प्रकार के विघ्नों से परेशान हैं या किसी परीक्षा या प्रतियोगिता में सफल होना चाहते हैं, तो गणेश अथर्वशीर्ष पाठ व मंत्र अवश्य करें। यह मंत्र आपको अवश्य ही लाभान्वित करेगा।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ की विधि

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने की विधि निम्नलिखित है:

  1. सबसे पहले एकांत स्थान में बैठ जाएं।

  2. अपने सामने गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति रखें।

  3. चंदन, सिंदूर, अक्षत, फूल, धूप, दीप आदि से गणेश जी की पूजा करें।

  4. पूजा के बाद, हाथ में जल लेकर गणेश जी से अपने मन की इच्छा बोलें।

  5. फिर, गणेश अथर्वशीर्ष मंत्र का जाप शुरू करें।

  6. मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करने का सबसे अच्छा समय सुबह-सुबह होता है। आप इसे शाम को भी कर सकते हैं।

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ के कुछ नियम

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • पाठ करते समय आपका मन शांत और एकाग्र होना चाहिए।

  • पाठ करते समय आपको किसी भी प्रकार की अशुद्धता से बचना चाहिए।

  • पाठ करते समय आपको किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए।

यदि आप इन नियमों का पालन करते हुए गणेश अथर्वशीर्ष पाठ करेंगे, तो आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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