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Saturday, March 14, 2026
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बिहार में चुनाव आयोग ने 8 पार्टियों को दिए चुनाव चिन्ह, जन सुराज को मिला ‘स्कूल बैग’ जानिए किसे क्या मिला?

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने 8 राजनीतिक दलों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने 8 राजनीतिक दलों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। ये चिन्ह अब इन पार्टियों के उम्मीदवारों को ही मिलेंगे और किसी अन्य को नहीं दिए जाएंगे। विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को एक बार फिर उनका पुराना और प्रिय चुनाव चिन्ह ‘नाव’ मिल गया है। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें ‘पर्स’ चिन्ह मिला था, लेकिन अब नाव उन्हें फिर मिल गया है। VIP के प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि यह संविधान की जीत है और पार्टी का नाव से भावनात्मक लगाव है।

उपेंद्र कुशवाहा को मिला गैस सिलेंडर

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को स्थायी रूप से ‘गैस सिलेंडर’ चुनाव चिन्ह मिला है। अब वे अपने प्रत्याशियों को इसी प्रतीक के साथ चुनावी मैदान में उतारेंगे।

प्रशांत किशोर की पार्टी को ‘स्कूल बैग’ मिला

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को चुनाव आयोग ने ‘स्कूल बैग’ चुनाव चिन्ह दिया है। पार्टी ने कहा कि यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतीक है, जो उनकी विचारधारा को दर्शाता है। सभी 243 प्रत्याशी इसी निशान पर चुनाव लड़ेंगे।

बाकी दलों को मिले ये चुनाव चिन्ह

भारत सार्थक पार्टी – कैंची

लोहिया जनता दल – बाल्टी

जन सहमति पार्टी – लेडीज पर्स

भारतीय जनता समाजसेवी पार्टी – बांसुरी

राष्ट्रीय समाजवादी लोक अधिकार पार्टी – अंगूठी

चुनाव चिन्हों को लेकर नियम सख्त

इन दलों ने चुनाव आयोग से आवेदन देकर अपने पसंदीदा प्रतीकों की मांग की थी। आयोग ने नियमों और दस्तावेजों की जांच के बाद इन्हें चिन्ह आवंटित किए। अब इन चिन्हों पर किसी और उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। कुल 243 सीटों पर चुनाव होंगे। NDA और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। वहीं, प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज पार्टी तीसरा विकल्प बनने की कोशिश में है। अन्य छोटी पार्टियां भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होगा। बिहार की राजनीति में चुनाव चिन्हों का बड़ा महत्व होता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहचान का आधार ज्यादातर प्रतीक होते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग का यह फैसला सभी पार्टियों के लिए बेहद अहम है और इससे चुनाव की रणनीतियों में नया मोड़ आ सकता है।

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