नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के एडीजी कुंदन कृष्णन के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य में मई से जून के बीच सबसे ज्यादा हत्याएं होती हैं, क्योंकि उस समय किसानों के पास कोई काम नहीं होता। उनका कहना है कि बेरोजगारी के कारण युवा पैसे के लालच में सुपारी किलर बन रहे हैं। इस बयान को लेकर भारी नाराज़गी हैं।
क्या कहा एडीजी कुंदन कृष्णन ने?
ADG कुंदन कृष्णन ने कहा, “मई-जून के महीनों में सबसे ज्यादा अपराध होते हैं, क्योंकि किसानों के पास इस दौरान कोई काम नहीं होता।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ युवा बेरोजगारी की वजह से सुपारी लेकर हत्या जैसे अपराधों में शामिल हो रहे हैं। समाजशास्त्रियों और किसान संगठनों का कहना है कि यह बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है। बिहार की करीब 70% आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को अपराध से जोड़ना ना सिर्फ तर्कहीन है, बल्कि अपमानजनक भी है। यदि किसान अपराध करने पर उतर जाएं, तो न पुलिस रोक पाएगी और न सेना। नक्सली आंदोलन और रणवीर सेना जैसे उदाहरण इस बात की गवाही देते हैं।
सुपारी किलर पर होगी नजर, बनेगा डाटाबेस
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडीजी ने बताया कि बिहार पुलिस अब सुपारी किलर्स का डाटाबेस तैयार करेगी। उनके नाम, फोटो, पते समेत सभी जानकारियां रिकॉर्ड में रखी जाएंगी ताकि किसी घटना के बाद उन्हें जल्दी पकड़ा जा सके। एडीजी ने बताया कि गंभीर अपराधों के मामलों में सजा जल्दी दिलाने के लिए राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट दोबारा शुरू किए जा रहे हैं। 2012-13 तक हर साल 2,000 से ज्यादा अपराधियों को सजा दी जाती थी, जो अब घटकर 500-600 रह गई है।
‘नक्सलियों का सफाया लगभग पूरा, STF ने 700 से ज्यादा गिरफ्तारियां की’
ADG कुंदन कृष्णन ने दावा किया कि बिहार में नक्सली घटनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। गया, औरंगाबाद, मुंगेर और जमुई जैसे इलाकों से नक्सलियों का सफाया हो चुका है। इस साल जनवरी से अब तक STF ने 700 से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार किया है। एडीजी का यह भी कहना था कि बेरोजगार युवा पैसे के लिए अपराध में शामिल हो रहे हैं। यह बात सीधे तौर पर सरकार के उस दावे पर सवाल उठाती है जिसमें कहा गया था कि राज्य में रोजगार के मौके बढ़े हैं। आलोचकों का कहना है कि बिहार को सीरिया या वियतनाम जैसे हालात वाला इलाका बताना पूरे समाज को कलंकित करने जैसा है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां अब भी अधिकतर लोग खेती पर निर्भर हैं, वहां किसानों को अपराध से जोड़ना उचित नहीं है। एडीजी कुंदन कृष्णन का बयान भले ही इरादतन नहीं रहा हो, लेकिन इससे समाज के सबसे जरूरी वर्ग, किसानों की छवि को ठेस पहुंची है। सरकार और पुलिस को अपराध रोकने की ठोस रणनीति बनानी चाहिए, न कि किसानों को संदिग्ध बताना चाहिए।





