नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। देश भर में आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के गवनिर्ंग बोर्ड में चेयरमैन और अन्य लोगों के पद कितने खाली पड़े हैं सोमवार को इसकी जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने साझा की। लोकसभा को दिए गए एक लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में, आईआईटी में चेयरमैन के 8 पद और एनआईटी में 21 पद रिक्त हैं। इसके अलावा, आईआईटी में निदेशकों के 5 पद और एनआईटी में 5 पद रिक्त हैं। आईआईटी और एनआईटी में रिक्त पदों के विषय में पूछते हुए लोकसभा सांसद विजय बघेल और सुमेधनन्द सरस्वती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से प्रश्न किया कि क्या इन रिक्त पदों को भरने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई समय सीमा है तो इसका क्या ब्यौरा क्या है, और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने उत्तर में कहा कि इन शिक्षण संस्थानों में अध्यक्ष और अन्य पदों का नामांकन व चयन एक सतत प्रक्रिया है। वहीं सांसद एम सेल्वाराजी और पीआर नटराजन ने पूछा कि क्या यह सच है कि सरकार देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में त्रिभाषा फामूर्ले के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने की प्रक्रिया में है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इसके जवाब में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में प्रावधान है कि संवैधानिक प्रावधानों, लोगों, क्षेत्रों और संघ की आकांक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया जाना जारी रहेगा। बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि, त्रिभाषा फार्मूले में अधिक लचीलापन होगा और किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद होंगी, तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारत की हों। विशेष रूप से, जो छात्र अध्ययन कर रहे और तीन भाषाओं में से एक या अधिक भाषा को बदलना चाहते हैं, वे ग्रेड 6 या 7 में ऐसा कर सकते हैं, जब तक कि वे तीन भाषाओं (साहित्य स्तर पर भारत की एक भाषा सहित) में बुनियादी दक्षता प्रदर्शित करने में सक्षम हों। ) शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि इसके अलावा यह प्रावधान है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से क्षेत्रीय भाषाओं और विशेष रूप से 8वीं अनुसूची में उल्लिखित सभी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए बड़ी संख्या में भाषा शिक्षकों में निवेश करने का एक बड़ा प्रयास होगा। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची। राज्य, विशेष रूप से भारत के विभिन्न क्षेत्रों के राज्य, एक-दूसरे से बड़ी संख्या में शिक्षकों को नियुक्त करने, अपने-अपने राज्यों में त्रिभाषा फार्मूले को संतुष्ट करने और देश भर में भारतीय भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए द्विपक्षीय समझौते कर सकते हैं। विभिन्न भाषाओं को पढ़ाने और सीखने और भाषा सीखने को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग किया जाएगा। –आईएएनएस जीसीबी/एएनएम




