प्रयागराज, 19 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के एक मामले में कहा कि इंटरमीडिएट के बाद प्रशिक्षण डिग्री लेने वाले भी टीचर की नियुक्ति पाने के हकदार हैं। स्नातक के बाद प्रशिक्षण न होने के आधार पर याची की नियुक्ति से इन्कार करने को गलत करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बेसिक शिक्षा नियमावली के अनुसार सहायक अध्यापक की नियुक्ति पात्रता 45 फीसदी अंक के साथ 10+2 की डिग्री और प्रशिक्षण है। ऐसे मे इंटरमीडिएट के बाद एनसीटीई से मान्य शिक्षा डिप्लोमा धारक को सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्त करने से इन्कार करना सही नहीं है। कोर्ट ने अमेठी के बीएसए को याची को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस.डी सिंह ने प्रिया देवी की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसका चयन सहायक अध्यापक भर्ती में किया गया। काउन्सिलिंग के बाद यह कहते हुए नियुक्ति देने से इंकार कर दिया कि नियमानुसार स्नातक के बाद प्रशिक्षण मान्य अर्हता है। किन्तु याची ने इंटर के बाद प्रशिक्षण हासिल किया है। बीएसए के इस आदेश को चुनौती दी गयी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर विक्रम सिंह केस में पहले ही व्याख्या कर दी गई है। जिसके तहत सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की न्यूनतम अर्हता इंटर के साथ प्रशिक्षण डिग्री है। ऐसे में याची को नियुक्ति देने से इंकार करना गलत है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/दीपक




