नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार के बाद अब असम में भी महिलाओं के लिए बड़ी राहत भरी योजना शुरू हो चुकी है। विधानसभा चुनाव से पहले असम सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (MMUA Scheme) को जमीन पर उतार दिया है। इस योजना के तहत राज्य की लाखों महिलाओं को 10 हजार रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जा रही है, ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
इसका मकसद गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा करना
असम सरकार का साफ कहना है कि यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और महिलाओं को कारोबार के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना खासतौर पर सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) से जुड़ी महिलाओं के लिए बनाई गई है, जो पहले से ही छोटे स्तर पर काम कर रही हैं या कुछ नया शुरू करना चाहती हैं।
जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, राज्य के सभी 35 जिलों में इस योजना को लागू किया जा चुका है। अब तक 15 लाख से ज्यादा महिलाओं के बैंक खातों में 10 हजार रुपये की शुरुआती राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। पहले सरकार का लक्ष्य 32 लाख महिलाओं तक पहुंचने का था, लेकिन योजना को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद इसे बढ़ाकर 40 लाख महिलाओं तक कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 8 लाख महिलाएं पहले ही ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है।
इस योजना के तहत मिलने वाले 10 हजार रुपये को महिलाएं अपने छोटे कारोबारजैसे सिलाई, डेयरी, सब्जी व्यवसाय, किराना दुकान या अन्य स्वरोजगार गतिविधियोंमें लगा सकती हैं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी।
यह योजना यहीं खत्म नहीं होती।
आवेदन प्रक्रिया की बात करें तो इसमें किसी ऑनलाइन पोर्टल की जटिलता नहीं रखी गई है। योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जो किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हों। इच्छुक महिलाओं को अपने पंचायत या ब्लॉक स्तर पर संचालित SHG से संपर्क करना होगा। वहां उनसे आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, निवास प्रमाण पत्र और SHG सदस्यता से जुड़े दस्तावेज लिए जाते हैं। सभी कागजातों के सत्यापन के बाद पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
खास बात यह है कि यह योजना यहीं खत्म नहीं होती। अगर महिला इस राशि का सही उपयोग कर अपना व्यवसाय सफलतापूर्वक शुरू कर लेती है, तो सरकार अगले चरण में कम ब्याज पर 25 हजार रुपये का लोन भी उपलब्ध कराती है। इतना ही नहीं, कारोबार के लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है।
आत्मनिर्भर बनाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देना।
सरकार का लक्ष्य साफ हैअसम की लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देना। बिहार के बाद असम की यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में लाखों परिवारों की तस्वीर बदल सकती है।





