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अरुणाचल के सीमावर्ती इलाकों में बनेंगे 40 स्वचालित मौसम केंद्र

नई दिल्ली/गुवाहाटी, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में 40 स्वचालित मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) स्थापित करेगा। एक बार स्थापित हो जाने के बाद, प्रतिष्ठानों से ना केवल क्षेत्र से बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी मौसम के बेहतर अवलोकन के लिए मददगार होने की उम्मीद है। आईएमडी एडब्ल्यूएस नेटवर्क के विस्तार के हिस्से के रूप में सभी मौसम की घटनाओं की बेहतर निगरानी और कैप्चरिंग के लिए अरुणाचल प्रदेश में 40 एडब्ल्यूएस स्थापित करेगा। यह न केवल आईएमडी के लिए बल्कि वायु सेना और भारतीय सेना के सैनिकों के लिए और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के लिए भी उपयोगी होगा, जो पूर्वोत्तर राज्य में पूर्वी हिमालय में कठिन इलाके में चलते हैं। अरुणाचल प्रदेश में मौजूदा ऑब्जर्वेशन नेटवर्क को बढ़ाने की मांग कई वर्षों से लंबित है। अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र का बमुश्किल 1/3 भाग जो असम के साथ है, मैदानी और लहरदार तलहटी है, लेकिन शेष 2/3 भाग सभी शक्तिशाली हिमालय हैं और इसका अधिकांश भाग ज्यादा ऊंचाई वाला इलाका है, जहां लगभग वर्ष भर हिमपात भी होता है। यह राज्य वर्ष के लगभग आठ महीनों में अत्यधिक उच्च वर्षा के लिए भी जाना जाता है। आईएमडी गुवाहाटी के केएन मोहन ने गुवाहाटी में आईएमडी के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) के संचालन के 25 वर्षों को चिह्न्ति करने के लिए एक आभासी कार्यक्रम के दौरान अपनी प्रस्तुति में कहा, हम पूर्वोत्तर भारत के सभी हेलीपोर्ट स्टेशनों के लिए मानव रहित और पूर्वोत्तर क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में लैंडिंग की सुरक्षा के लिए विमानन मौसम अवलोकन प्रणाली शुरू करने की योजना बना रहे हैं। गुवाहाटी के एक अन्य वैज्ञानिक संजय शॉ ने आईएएनएस को बताया, मौसम विभाग ने हाल ही में तवांग और बोमडिला जिलों में एक-एक स्नो गेज लगाया है और सीमावर्ती इलाकों में 40 के अलावा, प्रत्येक जिले में 2 एडब्ल्यूएस स्थापित करने की योजना है। शॉ ने कहा, इन प्रतिष्ठानों के लिए काम पहले ही शुरू हो चुका है। मोहन ने यह भी कहा कि टीम ने बारिश के विशेष वितरण की वास्तविक समय निगरानी के लिए अगरतला, शिलांग, ईटानगर और पूर्वोत्तर भारत के अन्य विकासशील शहरों के शहरी शहरों में स्वचालित वर्षा गेज (एआरजी) नेटवर्क के विस्तार की भी योजना बनाई है। नियोजित अन्य प्रतिष्ठानों में पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों में आठ एक्स-बैंड डॉपलर मौसम रडार; सभी एडब्ल्यूएस/एआरजी/हवाई अड्डे और पूर्वोत्तर भारत के अन्य डेटा से डेटा के रिसेप्शन, गुणवत्ता जांच और जीआईएस प्रतिनिधित्व के लिए डेटा प्रोसेसिंग सर्वर शामिल हैं। अन्य लोगों के अलावा, आईएमडी के महानिदेशक (मौसम विज्ञान) मृत्युंजय महापात्र और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन ने भी इस अवसर पर बात की। रविचंद्रन ने सलाह दी, जैसा कि आप वेधशालाओं और अनुकूलित पूर्वानुमानों के विस्तार की योजना बना रहे हैं, संबंधित राज्यों और जिलों से प्रतिक्रिया प्राप्त करें। –आईएएनएस एचके/एएनएम

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