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Friday, April 3, 2026
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Gandhi Jayanti 2021: बैंक नोट में आखिर कहां से आई महात्मा गांधी की तस्वीर, बेहद दिलचस्प है कहानी

नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा के नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर सालों से छपती आ रही है। लेकिन क्या कभी आपने इन नोटों में महात्मा गांधी की तस्वीर के पीछे की छिपी कहानी जानने की कोशिश की है। नहीं… तो चलिए आज गांधी जयंती के मौके पर हम आपको इसी दिलचस्प कहानी के बारे में बताएंगे।

रिजर्व बैंक ने पहली बार 1969 में महात्मा गांधी की तस्वीर वाले स्मरण के तौर पर 100 रुपये के नोट को पेश किया था। दरअसल, यह महात्मा गांधी का जन्म शताब्दी वर्ष था। मौजूदा नोटों पर गांधी जी की जो तस्वीर छपी है, वह तस्वीर पहली बार 1987 में छपे करेंसी नोट में देखने को मिली थी। महात्मा गांधी के मुस्कराते चेहरे वाली तस्वीर के साथ सबसे पहले 500 रुपये का नोट जारी किया गया था। इसके बाद यह तस्वीर दूसरे करेंसी नोटों पर भी इस्तेमाल होने लगी और आज भारतीय मुद्रा की पहचान बन गई है।

वर्ष 1996 में कई अहम फीचर्स के साथ आरबीआई ने नई महात्मा गांधी सीरीज के नोटों को पेश किया था। इनमें बदला हुआ वाटरमार्क, लेटेंट इमेज, विंडोड सिक्योरिटी थ्रेड और विजुअल हैंडीकैप्ड लोगों के लिए इंटेग्लियो फीचर्स शामिल किए गए। 1987 में महात्मा गांधी की तस्वीर को वाटरमार्क के रुप में इस्तेमाल किया जाता था।

1996 से महात्मा गांधी की तस्वीर वाले जो नए नोट मार्केट में आए उनमें 5 से लेकर 1000 रुपये वाले नोट सभी शामिल थे। इन नोटों में अशोक स्तंभ की जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का तस्वीर और अशोक स्तंभ की तस्वीर नोट के बायीं तरफ निचले हिस्से पर छापी गई।

क्या है इन नोटों पर छपी तस्वीर के पीछे की कहानी

महात्मा गांधी की जो तस्‍वीर आज हम भारतीय मुद्रा नोट पर देखते हैं, वह वायसराय हाउस (अब राष्‍ट्रपति भवन) में वर्ष 1946 में खींची गई थी। दरअसल, उस वक्त राष्‍ट्रपिता म्यांमार (तब बर्मा) और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस से मुलाकात वायसराय हाउस पहुंचे थे। उसी समय एक तस्वीर ली गई थी, जिसे पोट्रेट के रूप में भारतीय नोटों पर छापा जा रहा है।

हालांकि, यह तस्‍वीर किस फोटोग्राफर ने खींची इसके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। बता दें कि महात्मा गांधी की तस्वीर से पहले भारतीय मुद्रा नोटों अलग-अलग डिजाइन और तस्वीर रहती थीं। 1949 में तत्कालीन सरकार ने अशोक स्तंभ के साथ नए डिजाइन वाला 1 रुपये का नोट पेश किया था।

1953 से हिंदी को नोटों पर लिखा जाना शुरू किया गया। 1000, 5000 और 10000 के बड़ी कीमत वाले नोटों को 1954 में दोबारा उतारा गया। 1000 रुपये के नोट पर तंजोर मंदिर की आकृति अंकित थी, जबकि 5000 रुपये के नोट पर गेटवे ऑफ इंडिया और 10000 के नोट पर लॉयन कैपिटल, अशोक स्तंभ थे। हालांकि, इन नोटों को 1978 में बंद कर दिया गया था।

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