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Friday, March 20, 2026
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लोकसभा चुनाव में ‘चट ब्याह-पट टिकट’ की राजनीति हुई फ्लॉप, लोकसभा चुनाव से पहले तेजस्वी ने किया सियासी बहिष्कार

बाहुबली अशोक महतो ने लोकसभा चुनाव से पहले शादी कर पत्नी को टिकट दिलाने की कोशिश की, लेकिन तेजस्वी यादव ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। यह संकेत है कि राजद में बाहुबली तत्वों से दूरी बनाई जा रही है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार की सियासत में बाहुबली नेताओं की भूमिका सदैव चर्चा का विषय रही है, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले हुई एक शादी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। नवादा के विवादित बाहुबली अशोक महतो ने दिल्ली के आरके पुरम की रहने वाली अनीता देवी से पटना के मां जगदंबा देवी स्थान मंदिर में चुनाव से मात्र तीन दिन पहले शादी रचाकर पत्नी को मुंगेर से राजद का लोकसभा टिकट दिलवाने का रास्ता बनाया। हालांकि गुरुवार की रात राजद के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर अशोक महतो को गेट पर ही रोक दिया गया और उनसे मुलाकात नहीं कराई गई, जिससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी नेतृत्व अब बाहुबली महतो और उनके परिवार से दूरी बना रहा है।

शादी से टिकट तक का सफर

57 वर्षीय अशोक महतो ने 46 वर्षीय अनीता देवी से पटना के मां जगदंबा देवी स्थान मंदिर में बड़े धूमधाम से शादी की। उनके इस कदम ने राजनीतिक जगत में ‘चट ब्याह-पट टिकट’ की परंपरा को फिर से चर्चा में ला दिया। शादी के दिन करीब 50 गाड़ियों का काफिला मंदिर पहुंचा और समर्थकों का भारी जनसमूह मौजूद था। शादी के बाद अशोक महतो सीधे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे।

कौन हैं अशोक महतो?

अशोक महतो नवादा के पकरीबरावां क्षेत्र के बाहुबली नेता हैं, जिनका नाम कई आपराधिक मामलों में दर्ज है। 2006 में पुलिस गिरफ्त में आए महतो को नवादा जेल में 17 साल की सजा हुई, जिसमें उनके गैंग के साथी ने तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में फरार होने में मदद की थी। जेल से रिहा होने के बाद भी उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा कम नहीं हुई, लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ सके। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी अनीता देवी को मैदान में उतारने की रणनीति अपनाई।

राजद में तेजी से बदलते समीकरण

राजद सुप्रीमो लालू यादव द्वारा अनीता देवी को मुंगेर से टिकट दिए जाने के बाद भी पार्टी के युवा नेता और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अशोक महतो को अपने आवास पर मिलने से साफ इनकार कर दिया। यह कदम पार्टी के अंदर बदलते समीकरणों और बाहुबली तत्वों से दूरी बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह रुख पार्टी को युवा और मिडिल क्लास नेताओं की ओर झुकाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।

बाहुबली राजनीति का समाप्त होता दौर?

बाहुबली नेताओं की राजनीति बिहार में लंबे समय से चल रही है, लेकिन इस बार की घटना दर्शाती है कि पारंपरिक बाहुबली नेताओं का प्रभाव कम हो रहा है। तेजस्वी यादव जैसे युवा नेताओं के उदय के साथ ही पार्टी में पुराने बाहुबली नेताओं को स्थान कम मिल रहा है। यह बदलाव बिहार की राजनीति में नया समीकरण गढ़ सकता है और आगामी लोकसभा चुनाव में इसका असर साफ देखा जा सकता है।

अशोक महतो की शादी और पत्नी को टिकट दिलाने की कोशिश बिहार में ‘चट ब्याह-पट टिकट’ की पुरानी परंपरा को फिर से उजागर करती है, लेकिन तेजस्वी यादव की पार्टी के अंदर इस पर लगाम लगाने की कोशिश भी साफ दिखाई देती है। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि बिहार की सियासत अब बाहुबली तत्वों से दूर हटकर नए और युवा चेहरे तलाश रही है।

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