नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में उस समय हंगामा मच गया जब बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सदन के भीतर ई-सिगरेट पीने का मुद्दा उठाया। उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था कि मामला टीएमसी के एक सांसद से जुड़ा है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह गतिविधि संसदीय नियमों के खिलाफ है और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाती है। उनकी बात पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और सदन में थोड़ी देर के लिए शोर-शराबा बढ़ गया।
”सांसदों को अनुशासन का पालन करना चाहिए”
अनुराग ठाकुर ने कहा संसद वह जगह है जहां देश की जनता उम्मीद के साथ देखती है। यहां ऐसा कोई व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए जो संसदीय अनुशासन के खिलाफ हो। अगर जरूरत पड़े तो जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, “सदन के नियम सभी सांसदों पर समान रूप से लागू होते हैं। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, और हर सदस्य को इसकी गरिमा बनाए रखना चाहिए। स्पीकर ने यह भी बताया कि अभी तक उनके पास कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है।
भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह बैन क्यों?
भारत सरकार ने 2019 में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम पास कर ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसके तहत ई-सिगरेट की बिक्री, उत्पादन, आयात, निर्यात और विज्ञापन सब गैरकानूनी है। नियम तोड़ने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। सरकार का कहना था कि ई-सिगरेट युवाओं और स्कूल के बच्चों में तेजी से लोकप्रिय हो रही थी और इसे कम हानिकारक समझने की गलतफहमी फैल रही थी।
ICMR की चेतावनी: हार्ट अटैक का खतरा 79% बढ़ सकता है
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार ई-सिगरेट का रोजाना उपयोग हार्ट अटैक का खतरा 79% बढ़ा देता है। इसमें निकेल, टिन, सीसा जैसी भारी धातुएं मिलती हैं। ये धातुएं कैंसर, डीएनए क्षति और फेफड़ों के गंभीर रोगों का कारण बन सकती हैं।हालांकि नाम सामने नहीं आया है, लेकिन सदन में यह मामला बड़ा मुद्दा बन गया है। स्पीकर ने साफ कहा है कि अगर शिकायत मिली या सबूत सामने आया, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सदन में अनुशासन और स्वास्थ्य दोनों को लेकर यह बहस आगे और तेज हो सकती है।





