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Thursday, March 12, 2026
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सिद्धपीठ हथियाराम मठ महामंडलेश्वर ने राममंदिर के लिए एक 1.01 करोड़ की समर्पण निधि सौंपी

-अयोध्या में हो रहा राष्ट्र गौरव का निर्माण-भवानीनन्दन यति गाजीपुर, 05 मार्च (हि.स.)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर बनने वाले भव्य श्रीराम मंदिर के लिए सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने शुक्रवार को अपने शिष्य समुदाय के सहयोग से आरएसएस प्रांत प्रचारक रमेश जी को 1.01 करोड़ (1,01,01,101 रुपये) की समर्पण निधि सौंपी। सिद्ध पीठ हथियाराम मठ पर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति के निर्देश पर सिद्धपीठ से जुड़े क्षेत्र के शिष्य श्रद्धालु आज उपस्थित हुए। जहां उन्होंने आरएसएस काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी को धनराशि भेंट की। इस अवसर पर महामंडलेश्वर ने कहा कि पवित्र कार्य में दिया गया सहयोग सिद्धकारी होता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का मंदिर अयोध्या में वर्षों से लंबित है। जिसके भव्य भवन निर्माण की सहयोग प्रक्रिया में 50 करोड़ हिंदुओं सहित अन्य समाज के लोगों ने समर्पण राशि भेंट किया। यही हमारे राष्ट्र का गौरव है। श्रीराम मंदिर का निर्माण राष्ट्र गौरव का निर्माण है। उन्होंने भगवान राम को लेकर कहा कि जैसे शहद में मधुमक्खी रमण करती है, लेकिन मधुमक्खी के गुण उसके मिठास में रहती है। उसी तरह गुरु भी राम जैसे मिठास से निकलने का नाम नहीं लेते। ऐसे तत्वों का नाम है राम। भारत का सत्य सनातन धर्म है राम जिसकी मूर्ति को ही भगवान की मूर्ति के रूप में देखें। जिसकी चर्चा रामचरितमानस में भी उल्लेखित है। उन्होंने कहा कि मैं हिंदू ही नहीं हिंदू धर्माचार्य भी हूं। सनातन धर्म में सृष्टि निर्माण काल से ही सन्त महात्माओं द्वारा कपड़े की झोली में माला को रखकर राम राम जपा जाता है। ऐसे में अगर राम मंदिर निर्माण के लिए धर्माचार्यों द्वारा भी कुछ किया जाए तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। सन्त समाज के सहयोग से एक मुट्ठी धनराशि एकत्रित करते हुए उन्होंने समर्पित किया। जिससे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कार्य में शामिल होना बताया। बाबरी मस्जिद के कलंक से बेहतर है संघ का धर्मशाला राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण राशि एकत्रीकरण कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों द्वारा सिद्धपीठ महामंडलेश्वर से सवाल किया गया कि देश के कुछ धर्मचार्यों द्वारा अयोध्या में बन रहे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को संघ धर्मशाला की संज्ञा दी जा रही है। इस पर उन्होंने बेबाक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक 500 वर्षों से अधिक समय तक बाबरी मस्जिद का कलंक ढो रहा वह जन्मभूमिस्थल यदि संघ धर्मशाला बने तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी। संघ एकमात्र ऐसा संगठन है जो राष्ट्र निर्माण पर धर्म रक्षा के निमित्त कृत संकल्पित और निरंतर कार्य करता रहता है। हालांकि उन्होंने उन तथाकथित धर्माचार्यों की शंकाओं को निर्मूल बताते हुए कहा कि अयोध्या में बनने वाला भव्य श्रीराम मंदिर राष्ट्र गौरव के रूप में स्थापित होगा। -समपर्ण निधि अभियान धन संग्रह नहीं, जन संग्रह का काम प्रान्त प्रचारक इस अवसर पर काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि श्रीराम जन्म भूमि भव्य मन्दिर निर्माण में पूरे प्रदेश में सिद्धपीठ में भव्य आयोजन द्वारा संदेश गया जो राम जी के मंदिर से जुड़ा है। ऐसे पवित्र कार्य से जुड़कर सब को धन्य किया। श्रीराम आस्था व विश्वास के प्रतीक हैं आज पूरे देश में जो देश में प्रचार हुआ है यह अभियान धन संग्रह का नहीं बल्कि जन संग्रह का अभियान था। यह कार्य राम जी से जोड़ने का अभियान ही नही बल्कि ऊंच-नीच के भेदभाव दूर करने का अभियान था। ऊंची अट्टलिकाओं व झोपड़ी में रहने वाले की दूरी को भी मिटाने का लक्ष्य था। पूरा वातावरण राम मय हो रहा है ।राम मंदिर का निर्माण भव्य निर्माण भगवान राम की कृपा से हो रहा है। यह श्री राम की कृपा से हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब राम का चित्र व चरित्र हमारे अंदर होगा तभी भव्य राष्ट्र निर्माण की कल्पना साकार होगी व भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा। राम के चरित्र के अनुसरण करने से ही राम राज्य होगा या राम के संस्कार से राम राज्य भी होगा। राम के यहां कोई भेदभाव नहीं है। बताया कि भगवान राम ने दुश्मन खेमे से आए विभीषण को भी सम्मान दिया था जिसे लाने पर ही रामराज्य पूरा हुआ। राम मंदिर के भूमि पूजन नहीं था बल्कि विश्व गुरु बनने के लिए भूमि पूजन रहा। मंदिर पूरा होने पर भारत जगतगुरु के लिए माना जाएगा। यह अभियान दुनिया में भारत के जगतगुरु होने का सपना पूरा करने के लिए था। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीराम/संजय

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