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Friday, April 3, 2026
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पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर परिसीमन करने की जरुरत : सिंघवी

जयपुर, 03 मार्च (हि. स.)। छबड़ा विधायक व पूर्व मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने सरकार से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर नगर पालिकाओं का गठन किए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 12 जिलों में पंचायत चुनाव होने तक नई नगर पालिकाओं का गठन किए जाने पर रोक लगा दी गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, परिसीमन में की गई मनमानी के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। यदि सरकार ने पारदर्शी तरीके से परिसीमन किया होता तो यह न्यायिक विवादों में नहीं फंसता और 12 जिलों में पंचायत के चुनाव नहीं अटकते। अब सरकार इससे पिंड छुड़ाने के लिए नवगठित नगरपालिकाओं को विखंडित कर पंचायती राज संस्थाओं को पूर्व की भांति अस्तित्व में ला रही है। यही सब करना था तो नई नगरपालिकाओं का गठन ही क्यों किया गया? जब नगरपालिकाओं का गठन किया गया तब इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा गया कि पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर मामला कोर्ट में अटकेगा। विधायक ने कहा कि राज्य सरकार को उक्त 12 जिलों में जिला परिषद् एवं पंचायत समिति के वार्डो का नए सिरे से पुनर्गठन करना चाहिए एवं ऐसे क्षेत्रों को पूर्व में ही चिन्हित किया जाकर पृथक कर लेना चाहिए जो कि बजट घोषणा में घोषित नगरपालिकाओं से संबंधित क्षेत्र में आते है, जिससे बाद में असमंजस की स्थिति उत्पन्न नहीं हो एवं अकारण ऐसे क्षेत्रों में चुनाव नहीं कराए जाए जिससे राज्य सरकार पर अनावश्यक चुनावी खर्चे का भार न पड़े। मुख्यमंत्री को अपने अधीनस्थ मंत्रालय एवं अधिकारियों द्वारा पूर्व बजट में घोषित 17 नगरपालिकाओं का 23 फरवरी 2021 को बजट घोषणा के एक दिन पूर्व निरस्त/विखण्डित किया गया जो कि प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नवाचक चिन्ह अंकित करता है कि मुख्यमंत्री को अधीनस्थों द्वारा किसी प्रकार की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिसकी अनभिज्ञता में बजट घोषणा में पुन: नगरपालिकाओं के गठन की थोथी घोषणा की गई है। उन्होंने बताया कि नई नगरपालिकाओं के गठन की घोषणा मुख्यमंत्री ने बजट में की थी। इस पर रोक बजट घोषणा के क्रियान्वयन को रोकना है। सिंघवी ने बताया कि 12 जिलों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के आम चुनाव के लिए निर्वाचक नामावलिया 01 जनवरी 2020 के आधार पर तैयार की गई थी, जबकि चुनाव 2021 में सम्पन्न होने है। ऐसे में गत एक वर्ष की अवधि में जिन युवाओं की आयु 18 वर्ष पूर्ण हो गई है उन्हें मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं किया जा रहा है, जिससे वे अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रहेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित

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