back to top
17.1 C
New Delhi
Saturday, March 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Kanwar Yatra 2025: कावड़ यात्रा में इन नियमों का पालन करने पर ही मिलता है लाभ

कावड़ यात्रा शिव के भक्तों की एक तीर्थ यात्रा है। कांवड़ लाने वाले भक्तों को कांवड़ियों के रूप में जाना जाता है। लेकिन, क्या आप जानते है इन नियमों का ध्‍यान रखने पर ही ये यात्रा सफल मानी जाती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शिव भक्तों को सावन माह का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन पंचांग का पांचवा महीना होता है। यह पूरा महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। सावन में आने की जाने वाली कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कांवड़ यात्रा से जुड़े जरूरी नियम।

शिवरात्रि पर शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक 

शिव के भक्तों की तीर्थ यात्रा जिसे कांवड़ लाने वाले भक्तों को कांवड़ियों के रूप में जाना जाता है। यह एक कठिन यात्रा होती है, क्योंकि यह पूरी यात्रा पैदल की जाती है। हर साल लाखों कांवड़ियां हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर सावन शिवरात्रि पर अपने क्षेत्र के शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

इस दिन से हो रही है शुरुआत 

पंचांग के अनुसार, इस साल यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू होगी। वहीं जो लोग इस पावन यात्रा में शामिल होते हैं, उनके और उनके परिवार के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए। तभी इस यात्रा का पूरा फल मिलता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सावन माह की शुरुआत होते ही भक्त अपने-अपने स्थान से उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री आदि स्थानों से गंगा नदी के पवित्र जल को लाने के लिए निकल पड़ते हैं। इसमें शामिल होने से भक्तों के सभी दुखों का अंत होता है 

इसके बाद शिव भक्त गंगातट से कलश में गंगाजल भरते हैं। उसको अपनी कांवड़ से बांधकर अपने कंधों पर लटका लेते हैं। इसके बाद अपने क्षेत्र के शिवालय में लाकर इस गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। शास्त्रों में माना गया है कि सर्वप्रथम भगवान परशुराम ने कांवड़ यात्रा शुरू की थी।

कावड़ यात्रा के नियम

इस यात्रा के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन ही करना चाहिए।

इस दौरान किसी भी प्रकार के नशे, मांस-मदिरा या तामसिक भोजन आदि से दूर रहना चाहिए। 

इस यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर न रखा जाए। ऐसा होने पर कांवड़ यात्रा अधूरी मानी जाती है

ऐसे में कांवड़िए को फिर से कांवड़ में पवित्र जल भरना होता है।

अगर किसी वजह से इसे नीचे रखना पड़े, तो किसी स्वच्छ स्थान पर लकड़ी या कपड़े के ऊपर ही रखें। कांवड़ को अपवित्र हाथों से नहीं छूना चाहिए।

कांवड़िए को यात्रा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए।

यात्रा के दौरान भगवान शिव का ध्यान और भजन करते रहना चाहिए।

ज्यादातर कांवड़ यात्री नंगे पैर ही यात्रा करते हैं, क्योंकि इसे तपस्या का एक हिस्सा माना जाता है। 

हालांकि, आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ये निर्णय ले सकते है । 

यात्रा के दौरान रास्ते में अन्य कांवड़ियों या किसी भी व्यक्ति को परेशान न करें।

साधक जिस गंगाजल को लेकर चल रहे हों, उसकी पवित्रता का विशेष ध्यान दें।

यात्रा के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्‍यान रखें।

इन बातों का भी रखें ध्यान

कांवड़ यात्रा पूरी तरह पैदल की जाती है

इसके लिए किसी भी तरह के वाहन का प्रयोग नहीं किया जाता।

कावड़ को हमेशा स्नान करने के बाद ही स्पर्श किया जाता है। 

यात्रा के समय कांवड़िया से चमड़ा स्पर्श नहीं होना चाहिए ।

न ही कांवड़ को किसी के ऊपर से ले जाएं। 

भोलेनाथ की कृपा के लिए कांवड़ यात्रा में हर समय शिव जी के नाम का उच्चारण करते रहना चाहिए।

इस बार सावन महीने की शुरुवात 11 जुलाई को देर रात 02 बजकर 06 मिनट से होगी। 

इसका समापन 09 अगस्त को होगा।

इसके साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी सावन के साथ यानी 11 जुलाई से होगी।

Advertisementspot_img

Also Read:

‘ये बकवास बंद करो…’ कांवड़ यात्रा में लड़कियों के अश्लील डांस पर भड़कीं सिंगर अनुराधा पौडवाल

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । कावडियों के लिए सावन का यह महीना खास होता है। सावन शिवरात्रि के इस मौके पर देश के अलग-अलग...
spot_img

Latest Stories

क्यों है वैष्णो देवी की इतनी मान्यता, जानिए माता रानी से जुड़ी कहानी और कथा

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। नवरात्रि का पर्व चल रहा ऐसे...

मिलिंद नाम का मतलब- Milind Name Meaning

Milind Name Meaning - मिलिंद नाम का मतलब: Honeybee/मधुमक्खी Origin...

चैत्र नवरात्रि अष्टमी कब है? जानें कन्या पूजन की सारी जानकारी

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिन्दू...

Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल का सबसे अमीर विधायक कौन? जानिए कितनी है नेटवर्थ

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। साल 2026 के विधानसभा चुनावों से...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵