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Wednesday, March 18, 2026
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सावन में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं इन 5 जगहों पर लगते हैं सबसे बड़े मेले, दूर-दूर से आते हैं लाखों शिवभक्त

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान पूरे देश में शिवभक्ति की लहर दौड़ जाती है। लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर जलाभिषेक के लिए निकलते हैं

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भोलेनाथ भगवान का सबसे प्रिय सावन का महीना जों खास भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान पूरे देश में शिवभक्ति की लहर दौड़ पड़ती है जहां लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर जलाभिषेक करने दूर-दूर से निकलते है। और भोलेनाथ की जय जयकार से पूरा वातावरण गूंज उठता है। सावन में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर भव्य मेलों का आयोजन भी होता है जो भक्ति और आस्था के साथ-साथ संस्कृति की झलक भी देखने लायक होता है जहां इन मेलों में भक्तों की भीड़, शिव मंदिरों की सजावट और उत्सव का माहौल होता है चलिए जानते हैं सावन के महीने में देश के विभिन्न हिस्सों में लगने वाले कुछ प्रसिद्ध मेलों के बारे में। 

सावन का महीना बौछारों की फूहार और शिव भक्तों की हर-हर महादेव की जयकार करते हुए कावंड़ यात्रा करना अपने आप में भक्ति और आस्था के साथ-साथ संस्कृति की झलक भी पेश करते हैं। जहां इस दौरान मंदिरों में रोज पूजा पाठ के साथ कइ जगहों पर इस अवसर पर भव्य मेलें भी लगते है जहां दूर-दूर से भक्त आते है दर्शन करने लगती है लाखों की भीड़ जिनमें कुछ इस प्रकार है इन मेलों की लिस्ट 

हरिद्वार का सावन मेला

सावन का सबसे बड़ा मेला हरिद्वार में लगता है। जिसे शिवजी का धाम कहा जाता है सावन में यह स्थान शिवभक्तों से भर जाता है। जहां हर साल लाखों कांवड़िए गंगा जल भरने आते है । और पैदल चलकर शिव मंदिरों में जल चढ़ाने जाते हैं। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की तरफ से खास इंतजाम किए जाते हैं यह मेला सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद खास होता है।

काशी का सावन उत्सव

बनारस को भगवान शिव की नगरी माना जाता है। जिसे आज वाराणसी भी कहते है यहां सावन का महीना बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष झूला श्रृंगार जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है। यहां सात अलग-अलग मार्गों से कांवड़िए भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। जहां इस दौरान शिव मंदिरों की सजावट, श्रद्धालुओं की भीड़ और गंगा आरती का मनोरम दृश्‍य देखने लायक होता है।

सोमनाथ मंदिर में भी रहता है उत्सव का माहौल

शिवजी का बहुत ही प्राचीन और पवित्र मंदिर गुजरात का सोमनाथ मंदिर जहां सावन के महीने में रौनक देखते ही बनती है। सुबह 4 बजे से लेकर रात 10 बजे तक ये मंदिर भक्तों की भीड़ से भरा रहता है। सोमनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। सावन के महीने में यहां भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिलता है।

देवघर का श्रावणी मेला है खास

बाबा बैद्यनाथ धाम झारखंड के देवघर जिले में स्थित जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर साल लाखों की संख्या में कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। ये मेला सावन के दौरान सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। पूरा देवघर इलाका भक्तों से भर जाता है1 यहां की कांवड़ यात्रा बहुत ही कठिन मानी जाती है, लेकिन श्रद्धालु पूरे जोश और भक्ति से इस यात्रा को पूरा करते हैं।

ओंकारेश्वर में सावन की धूम देखते बनती है

मध्य प्रदेश में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सावन की धूम देखते बनती हैओम के आकार के एक छोटे से द्वीप पर स्थित सावन के महीने में यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और धार्मिक आयोजन होते हैं। यहां पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन सिर्फ 12 किलोमीटर की दूरी पर है। सावन के महीने में ओंकारेश्वर की यात्रा एक विशेष अनुभव देती है।

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