back to top
18.1 C
New Delhi
Wednesday, March 25, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Pitru Paksh 2025: गया के अलावा 7 पवित्र स्थल, जहां कर सकते हैं पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध,मिलेगी मुक्ति

पितृ पक्ष की शुरुआत होते ही बिहार के गया में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। यहां पर लोग पिंड दान के लिए पहुंचने लगते हैं। इस जगह पर पिंड दान से पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । पितृ पक्ष की शुरुआत होते ही बिहार, गया के विष्णुपद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। लोग अपने पूर्वजों के श्राद्ध और पिंड दान के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि यहां दान से पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है और वे शांति पूर्वक परलोक की ओर प्रस्थान करते हैं।

लेकिन केवल गया ही नहीं, पूरे भारत में सात अन्य पवित्र स्थलों पर भी पिंड दान का विशेष महत्व है। जो लोग गया नहीं जा पाते, वे इन स्थलों पर पिंड दान करके अपने पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति दिला सकते हैं और उन्हें शांति प्रदान कर सकते हैं। जानें कौन सी हैं वो 7 पवित्र जगहें, जहां पर पिंड दान से पूर्वजों को मिलती है शांति।

उत्‍तरप्रदेश, काशी

भगवान शिव की नगरी काशी को मुक्ति का मार्ग माना जाता है। कई लोग जीवन के अंतिम समय में यहां रहना पसंद करते हैं। काशी के मणिकर्णिका घाट और दशाश्वमेध घाट पर पिंड दान और तर्पण करने से यह कार्य सीधे भैरव और भगवान शिव द्वारा स्वीकार किया जाता है, जिससे पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।

ध्रुव घाट, मथुरा

कान्हा की नगरी मथुरा भी पिंड दान के लिए प्रसिद्ध है। यमुना नदी पर बने 24 घाटों में से ध्रुव घाट पर श्रद्धालु तर्पण और पिंड दान करते हैं। मान्यता है कि, राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव ने यहां अपने पूर्वजों के लिए पिंड दान किया था, जिसे श्रीहरि विष्णु ने स्वीकार किया। इसी कारण मथुरा का ध्रुव घाट पूर्वजों की मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हर की पैड़ी, हरिद्वार

हर की पैड़ी, यानी भगवान हरि विष्णु के चरण, हरिद्वार का एक अत्यंत पवित्र स्थल है। मायापुरी के नाम से भी प्रसिद्ध यह नगर श्राद्ध और पिंड दान के लिए जाना जाता है। त्रिगंगा, नारायणशिला और कनखल धाम जैसे स्थानों पर विभिन्न प्रकार की आत्माओं की मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है। विशेष रूप से कनखल में पिंड दान से उन आत्माओं को मुक्ति मिलती है, जिनकी मृत्यु अकाल हुई हो।

देव प्रयाग, उत्तराखंड

सनातन धर्म में देव प्रयाग का विशेष महत्व है, जहां अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा का निर्माण करती हैं। मान्यता है कि, यहां राजा राम ने अपने पिता दशरथ का तर्पण किया था। श्रद्धालु मानते हैं कि देव प्रयाग में तर्पण करने से जन्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है।

त्रियुगी नारायण मंदिर, उत्तराखंड

त्रियुगी नारायण मंदिर को शिव और पार्वती के विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित सरस्वती कुंड में श्रद्धालु तर्पण करते हैं। यह मंदिर लगभग 18 हजार साल पुराना है और इसमें भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी और सरस्वती की भी स्थापना है, जो इसे अत्यंत पवित्र बनाती है।

ब्रह्म कपाल शिला, बदरीनाथ

बदरीनाथ मंदिर के पास स्थित ब्रह्मकपाल शिला पितृ तर्पण का प्रमुख स्थल माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पिंड दान करने का फल गया से आठ गुना अधिक होता है। इस पवित्र शिला पर दान करने से पितरों को शांति मिलती है और परिवार को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि, पांडवों ने भी अपने पूर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए यहीं पिंड दान किया था।

पिहोवा तीर्थ, कुरुक्षेत्र

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भी एक पवित्र स्थल है, जहां पिंड दान से पितरों को शांति मिलती है। यहां स्थित सरस्वती सरोवर में स्नान कर श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंड दान करते हैं। यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और पिंड दान के लिए यहां लोगों की भीड़ हमेशा उमड़ती रहती है।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

Astro Today 25 March 2026: मीन राशि -नहीं इनकम के सोर्स मिलेंगे, धन लाभ हो सकता है

धन लाभ: एक्स्ट्रा इनकम के सोर्स मिल सकते...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵