नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। तमिलनाडु सरकार केंद्र की तीन भाषा वाली योजना का भरसक विरोध कर रही है। तमिलनाडु सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्य पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। हिंदी भाषा को दक्षिण भारतीय राज्यों में बतौर तीसरी भाषा पढ़ाने को लेकर संसद में भी तीखी बहस जारी है। इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमएक स्टालिन ने रुपये का चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने तमिलनाडु के बजट से रुपये के चिह्न को हटा दिया है। इसके साथ ही उन्होंने रुपये के चिह्न को बदलने की मांग की है।
स्टालिन सरकार का बड़ा कदम
तीन भाषा नीति विवाद के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK ) सरकार ने रुपया का चिह्न हटाने का फैसला किया है। मिली जानकारी के मुताबिक, रुपये का चिह्न हटाकर उसके स्थान पर तमिल अक्षर से बदल दिया गया है। इस मुद्दे की खास बात है कि, यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब संसद में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर हिंदी थोपे जाने की कोशिश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।
इन राज्यों के सीएम को लिखा लेटर
कुछ दिन पहले ही सीएम एमके स्टालिन ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। इस लेटर में उन्होंने कथित आगामी परिसीमन अभ्यास के लिए “ज्वाइंट एक्शन कमेटी” (Joint Action Committee) के गठन करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस तरह के अपील वाला लेटर केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटका के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को भेजा है। हालांकि, चर्चा के लिए जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है वहां के सीएम को भी इस बैठक में आमंत्रित किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, यह बैठक 22 मार्च को होना तय किया जा चुका है।





