सुकमा, 10 जून (हि.स.)। जिले के बासागुड़ा इलाके से बीते छह जून को नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पित रामकृष्ण मरकाम का अपहरण कर लिया था। जिसके बाद रामकृष्ण को नक्सली अपने जंगल ठिकाने ले गये और बंधक बनाकर रखा। नौ जून की रात नक्सलियों के संत्रियों को चकमा देकर रामकृष्ण नक्सलियों के ठिकाने से भागने में कामयाब रहा। रामकृष्ण मरकाम नक्सलियों के ठिकाने से भागने के बाद पूरी रात जंगली रास्तों से चलते हुए जगरगुंडा थाने पहुंच गया। मिली जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सली रामकृष्ण मरकाम आत्मसमर्पण के बाद से सुरक्षाबलों के लिए गोपनीय सैनिक का काम करता था, और इसी दौरान किसी नक्सली ने रामकृष्ण से आत्मसमर्पण करने सम्पर्क किया जिसके लिए रामकृष्ण को बासागुड़ा के ही एक पारा में बुलाया गया जहां पहले से ही पांच से छ: नक्सली मौजूद थे, जैसे ही रामकृष्ण मौके पर पहुंचा वैसे ही रामकृष्ण का हाथ बांधकर नक्सली उसे अपने साथ ले गए वहीं रामकृष्ण की मोटर साइकिल भी नक्सली अपने साथ ही ले गए थे, जो अब भी नक्सलियों के ही पास है प्राप्त जानकारी के अनुसार नक्सलियों ने अपहरण के बाद रामकृष्ण को मंडी मरकागांव में रखा था, जहां नक्सलियों की जगरगुंडा एरिया कमेटी का कमांडर जगदिश द्वारा रामकृष्ण को 11 जून को मौत की सजा देने का ऐलान किया था। बुधवार की देर रात रामकृष्ण को भागने का मौका मिल गया। जंगल के रास्ते पूरी रात चलकर गुरुवार सुबह 11 बजे वह जगरगुंडा थाने पहुंचा जहां रामकृष्ण ने स्वयं का परिचय दिया और आपबीती जवानों को बताई। पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई जिसके बाद अधिकारियों के निर्देश पर रामकृष्ण से पुछताछ की गई और पुरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई। नक्सलियों के चंगुल से भागकर वापस लौटा रामकृष्ण पुरी तरह स्वस्थ बताया गया है, जिसे जगरगुंडा थाने में ही रखा गया है। इसकी पुष्टि सुकमा एसपी कन्हैया लाल ध्रुव ने की है। हिन्दुस्थान समाचार/ राकेश पांडे





