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Thursday, March 19, 2026
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बिना नोटिस तोड़ी दुकान! बुलडोजर एक्शन पर रोते हुए बोले BJP नेता, हम हाथ-पैर जोड़ते रहे, पर किसी ने नहीं सुना

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ मुहिम के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। भाजपा मंडल मंत्री बृजेंद्र सैनी के छोटे भाई चेतन सैनी ने आत्महत्या कर ली।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ मुहिम के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। भाजपा मंडल मंत्री बृजेंद्र सैनी के छोटे भाई चेतन सैनी ने आत्महत्या कर ली। चेतन मंडी समिति में अपने पापा की आढ़त पर बैठते थे। आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनकी दुकान पर बुलडोजर चला दिया।

रोते हुए बोले भाजपा नेता

भाजपा मंडल मंत्री बृजेंद्र सैनी ने मीडिया के सामने फूट-फूटकर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “हमने हाथ-पैर जोड़े, बस 5 मिनट मांगा था कि सामान हटा लें, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सब कुछ बर्बाद कर दिया। भाई बहुत परेशान थे। हमने बहुत समझाया, पर उन्होंने छत से कूदकर जान दे दी।

बिना नोटिस तोड़ी गई दुकान?

परिवार का आरोप है कि न कोई नोटिस दिया गया और न कोई चेतावनी। अचानक बुलडोजर लेकर पहुंचा प्रशासन और दुकान गिरा दी। लाखों रुपये का नुकसान हो गया। चेतन सैनी ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट की मुरादाबाद मंडी के अंदर प्रशासन का आक्रमण। सब बर्बाद कर दिया। आढ़ती सब खत्म हो गए। भगवान की दुआ से माल पर बारिश भी हो गई। प्रशासन मजे ले रहा था। अब बताइए क्या करा जाए? 

 कैसे हुआ हादसा?

मंगलवार रात चेतन घर लौटे। मानसिक रूप से टूट चुके थे। ऊपरी मंजिल पर गए और छत से कूद पड़े। पत्नी ने रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

डिप्टी CM का वादा, “दोषी बख्शे नहीं जाएंगे”

घटना के बाद प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक खुद मुरादाबाद पहुंचे। उन्होंने कहा,”यह घटना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी। जिसने भी बिना प्रक्रिया का पालन किए यह कार्रवाई की है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पीड़ित परिवार के साथ है। इससे एक दिन पहले मंडी समिति कार्यालय में कुछ आढ़तियों ने हंगामा किया था। इसी के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर मंडी में दुकानों पर बुलडोजर चलवाया। उसी में चेतन सैनी की दुकान भी तोड़ी गई। क्या प्रशासन ने बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए दुकान तोड़ी? अगर नोटिस दिया होता, तो क्या ये जान बचाई जा सकती थी? क्या गरीब और छोटे व्यापारियों की बात सुनना जरूरी नहीं?

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