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Sunday, March 29, 2026
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शिक्षकों को फिनलैंड भेजने की फाइल पर एलजी को डिप्टी CM ने फिर लिखी चिट्ठी

मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षकों के लिए फिनलैंड आधारित ट्रेनिंग की फाइल लौटाने की बात कही। एलजी को पत्र लिखकर ट्रेनिंग प्रोग्राम की फाइल को तत्काल वापिस लौटाने की बात कही है।

नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) द्वारा दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षकों के लिए फिनलैंड आधारित ट्रेनिंग की फाइल लौटाने की बात कही। सिसोदिया ने इस संदर्भ में एलजी को पत्र लिखकर ट्रेनिंग प्रोग्राम की फाइल को तत्काल वापिस लौटाने की बात कही है।

फाइल को 15 दिन से ज्यादा नहीं रोक कर रख सकते

सिसोदिया ने लिखा है कि 20 जनवरी से एलजी के टेबल पर फाइल पड़ी है लेकिन अभी तक उनके द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कानूनन एलजी किसी फाइल को 15 दिन से ज्यादा नहीं रोक कर रख सकते है लेकिन इसके बावजूद एलजी इसपर कोई निर्णय नहीं ले रहे है और एक महीने से ज्यादा समय से फाइल दबाकर बैठे हुए है।

शिक्षकों को फिनलैंड भेजने पर एलजी के निर्णय लेने का समय ख़त्म

टीबीआर के तहत एलजी का डिफरेंस ऑफ ओपिनियन व्यक्त करने समय खत्म हो गया है। इसलिए, संविधान और टीबीआर के नियमों के तहत शिक्षकों को फिनलैंड भेजने पर एलजी के निर्णय लेने का समय ख़त्म हो चुका है। इसलिए एलजी फाइल वापिस लौटाए ताकि हम अपने शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेज सके।

दफ्तर में एक महीने से अधिक समय से लंबित

उपमुख्यमंत्री ने लिखा है कि आपके द्वारा शिक्षकों को फिनलैंड भेजने संबंधित फाइल में उठाए गए आपत्तियों को दो बार दूर करने के बाद, दोबारा 20 जनवरी 2023 को आपके पास फाइल भेजी गई, लेकिन एक महीने से ज्यादा होने के बावजूद आपके द्वारा इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी देरी की वजह से पहला बैच आपके द्वारा उठाए गए बार-बार के आपत्तियों के कारण नहीं जा सका। और अब मार्च 2023 में शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजे जाने की फाइल आपके दफ्तर में एक महीने से अधिक समय से लंबित है।

शिक्षा एक स्थानांतरित विषय

सिसोदिया ने नियमों का हवाल देते हुए कहा कि, “ शिक्षा एक स्थानांतरित विषय है और दिल्ली सरकार के पास इस पर विशेष कार्यकारी नियंत्रण है। उपराज्यपाल के पास शिक्षा के किसी भी मामले में कोई भी फैसला लेने की शक्ति नहीं है। हालांकि, यदि उपराज्यपाल किसी मंत्री के किसी भी फैसले से असहमत होते हैं, तो वह मामला राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। लेकिन उससे पहले संविधान और व्यवहार विधिनियम नियम 1993 के अनुसार, उपराज्यपाल को संबंधित मंत्री के साथ चर्चा करके इसे सुलझाने का प्रयास करना होगा व मम्मले को मंत्रीपरिषद् के पास भेजना होगा और यदि यहां कोई निष्कर्ष नहीं निकलता तो फिर उपराज्यपाल इसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते है।

प्रस्तावों की जांच हो

उपमुख्यमंत्री ने 20 जनवरी को दिल्ली एलजी को फिनलैंड आधारित शिक्षक प्रशिक्षण का प्रस्ताव भेजा था। इससे पहले एलजी ने चुनी हुई सरकार की मंजूरी के बावजूद फाइल पर आपत्ति जताकर दो बार फाइल को रोका था। एलजी को भेजे प्रस्ताव में उपमुख्यमंत्री ने कहा था, “सरकार ने कॉस्ट-बेनफ़िट विश्लेषण सहित सभी पहलुओं से प्रस्तावों की जांच की है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए इसे आवश्यक पाया है। यदि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने अपने शिक्षकों को विदेश भेजने का फैसला किया है, तो एलजी बार-बार आपत्तियां उठाकर इसे कैसे रोक सकते हैं।

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