नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा है कि सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बार-बार गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है। इमरान मसूद को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि गठबंधन का निर्णय नेतृत्व स्तर पर होता है, जबकि पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता अक्सर अपनी व्यक्तिगत राय जाहिर करते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार नेता केवल चर्चा में बने रहने या उत्साहवश बयान देते हैं, जिन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।
सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और सपा की नेतृत्व की बातों पर ही फोकस करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सपा और कांग्रेस की तरफ से जो भी बयान आएगा और अब तक के अनुभव के आधार पर, मुझे लगता है कि आगे भी यही दिशा रहेगी। लीडरशिप बैठक करेगी और सीटों को लेकर चर्चा पूरी हो जाएगी।
इमरान मसूद पर सपा नेता उदयवीर सिंह का तीखा प्रहार
उदयवीर सिंह ने इमरान मसूद के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा, “वे क्या कहते हैं? उनसे पूछिए कि वे राहुल गांधी से बात करके सीधे क्यों नहीं कहते। इमरान मसूद असल में कांग्रेसी नहीं हैं, बल्कि वे सपा से जुड़े हुए हैं। उनकी बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि नेतृत्व की बातों को प्राथमिकता देनी चाहिए।”
उन्होंने राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष के एक साल के कार्यकाल की भी प्रशंसा की। उदयवीर सिंह ने कहा कि विपक्ष ने मजबूती से मुद्दे उठाए और प्रभावी भूमिका निभाई। इसके विपरीत, सरकार का कार्यकाल सही मायनों में खराब रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में चर्चा से बचती रही और विपक्षी नेताओं के माइक्रोफोन बंद करवाती रही। साथ ही, उपसभापति की भूमिका को लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।
‘कुर्सी के लिए धोखा नहीं करेंगे’- उदयवीर सिंह
अखिलेश यादव के नेता विपक्ष बनने के सवाल के जवाब में उदयवीर सिंह ने कहा कि अखिलेश हमारे सबसे बड़े नेता हैं और हम चाहते हैं कि उन्हें सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिले। लेकिन सदन में नंबर गेम चलता है, जो पार्टी सबसे अधिक सीटें जीतेगी, उसी का नेता विपक्ष होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी लीडरशिप को लेकर चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि उस वक्त दिल्ली में मायावती को नेतृत्व के लिए आगे बढ़ाया जा रहा था और इस बार भी जब मामला आया, तो अखिलेश ने अपनी महत्वाकांक्षा को आगे नहीं रखा। उन्होंने कहा, “हम कुर्सी के लिए कभी धोखाधड़ी नहीं करेंगे।” उदयवीर सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार गठबंधन से अलग हो गए, लेकिन हम पूरी ताकत से गठबंधन के साथ खड़े रहे।




