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क्या परमाणु नीति में होने जा रहा है बदलाव? निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन की अनुमति मिलने की संभावना

भारत का परमाणु ऊर्जा उद्योग एक बहुत बड़े बदलाव के दौर से गुज़रने वाला है। इसका कारण है न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के द्वारा आगामी परमाणु परियोजनाओं में हिस्सेदारी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क। केंद्र सरकार देश के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने पर विचार कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को विनियमित करने वाले कानूनों में दो महत्वपूर्ण संशोधन पेश कर सकती है।

इनमें से पहला संशोधन परमाणु दायित्व अधिनियम के प्रावधानों में ढील दे सकता है। यह संशोधन परमाणु दुर्घटना की स्थिति में उपकरण विक्रेताओं की देयता को सीमित करेगा। यह जिम्मेदारी दो तत्वों से संबंधित होगी। एक है वित्तीय और दूसरा है वह समय-सीमा जब यह दायित्व प्रभावी होगा। दूसरे संशोधन का उद्देश्य निजी कंपनियों को देश की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में प्रवेश के अवसर प्रदान करना होगा। विदेशी कम्पनियों की भविष्य की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं तक पहुंच भी सीमित हो सकती है।

अब तक देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर सरकारी कंपनियों का प्रभुत्व था। ऐसा माना जा रहा है कि कानून में ये दोनों बदलाव भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की व्यावसायिक क्षमता में सुधार लाने के लिए किए जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान सितंबर 2005 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अलावा, ये सुधार अमेरिका के साथ चल रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण हैं, और इस प्रकार भारत में व्यापार और निवेश के लिए अमेरिका को आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास 

परमाणु समझौते के बाद भी देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ज्यादा विदेशी निवेश नहीं हुआ है। उम्मीद है कि दोनों सुधारों के माध्यम से ये निवेश बाधाएं दूर हो जाएंगी। परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 के कारण, जी.ई.-हिताची, वेस्टिंगहाउस और फ्रांसीसी परमाणु ऊर्जा कंपनी अरेवा (अब फ्रैमेटोम) जैसे विदेशी निवेशक भारत आने के लिए कम इच्छुक हैं। इस कानून के तहत परमाणु दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई करने का प्रावधान है। इसके लिए प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी गई है।

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